- विदेशों में भी बढ़ रहा ज्योतिष के प्रति आकर्षण
कानपुर। राज्यसभा सांसद एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने कहा कि ज्योतिष सरीखी भारत की विधाओं का दुनिया लोहा मान रही है। ज्योतिष भारतीय ज्ञान परंपरा का महत्वपूर्ण अंग होने के साथ खगोलीय गणनाओं से भी जुड़ा है। ज्योतिष और विज्ञान जब एक-दूसरे के पूरक बनकर कार्य करते हैं तो भारत की ज्ञान परंपरा का दुनिया में परचम लहराता है। विदेशों में भी ज्योतिष के प्रति आकर्षण बढ़ रहा है।

- आत्मचिंतन और सकारात्मक दृष्टिकोण का माध्यम बने ज्योतिष
दुर्गा प्रसाद विद्यानिकेतन, गुजैनी, कानपुर में प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित के.एम. दुबे पद्मेश द्वारा आयोजित 76वें राष्ट्रीय ज्योतिष सम्मेलन-2026 एवं सौमित्र दुबे विद्वत शिखर सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में डा. शर्मा ने कहा कि ज्योतिष केवल भविष्य बताने का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्ति को आत्मचिंतन, अनुशासन और सकारात्मक दृष्टिकोण प्रदान करने का साधन भी बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि ज्योतिष के सही ज्ञान का उद्देश्य भय पैदा कर आर्थिक लाभ कमाना नहीं है। इसका दुरुपयोग किसी भी स्थिति में उचित नहीं है।

- ज्योतिष की विधाओं पर शोध की जरूरत
डॉ. शर्मा ने कहा कि ज्योतिष और विज्ञान को लेकर बहस होती रहती है, लेकिन दोनों का अपने-अपने स्थान पर महत्व है। परंपराओं पर गर्व के साथ उनके अध्ययन में तर्क और शोध की कसौटी को स्वीकार किया जाना चाहिए। आस्था के साथ वैज्ञानिक अनुसंधान भी आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने ज्योतिष की विभिन्न विधाओं पर शोध किए जाने और शोध से सामने आने वाले नए ज्ञान को व्यापक स्तर पर प्रसारित करने की आवश्यकता बताई।

- डिजिटल युग में बदल रहा ज्योतिष का स्वरूप
उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में ज्योतिष का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। पंचांग और कुंडली जैसी जानकारियां डिजिटल माध्यम से लोगों तक पहुंच रही हैं। ऐसे में ऑनलाइन ज्योतिष में पारदर्शिता, विशेषज्ञता और नैतिक मानकों का पालन जरूरी है। ज्योतिष में कंप्यूटर का प्रयोग पूरी सतर्कता से किया जाना चाहिए, क्योंकि थोड़ी सी असावधानी बड़ा भ्रम पैदा कर सकती है। ज्योतिष का सरलीकरण कर इसे दुनिया के हर कोने तक पहुंचाने की आवश्यकता है।
- प्रधानमंत्री मोदी के समय में हो रहा ज्ञान परंपराओं का विस्तार
डॉ. शर्मा ने कहा कि कानपुर औद्योगिक नगरी होने के साथ शिक्षा और सांस्कृतिक चेतना का भी केंद्र है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत की ज्ञान परंपराएं केवल संग्रहालयों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनका संरक्षण, दस्तावेजीकरण और विस्तार भी हो रहा है। नई शिक्षा नीति में भारतीय परंपराओं को प्रोत्साहन देने के लिए भी व्यवस्था की गई है। भारत के पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक पद्धतियों से जोड़ना समय की मांग है।
- नई पीढ़ी तक पहुंचे ज्ञान की विरासत
उन्होंने वरिष्ठ ज्योतिषाचार्यों से अपने शिष्य तैयार करने और उन्हें अपना ज्ञान प्रदान करने की अपील की। कहा कि इससे भारतीय ज्ञान की यह परंपरा कई पीढ़ियों तक आगे बढ़ेगी। इसे आधुनिक उपयोगिता के साथ आगे बढ़ाने के साथ यह भी प्रयास होना चाहिए कि ज्योतिष अंधविश्वास का कारण न बने और लोगों का भरोसा इस ज्ञान परंपरा के प्रति और मजबूत हो।
- विद्वानों के योगदान को सराहा
इस अवसर पर ज्योतिष, भारतीय ज्ञान परंपरा एवं सनातन संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन में विद्वानों के महत्वपूर्ण योगदान पर प्रकाश डाला गया। सम्मेलन में भाजपा अध्यक्ष शिवराम, भाजपा उपाध्यक्ष कानपुर शशांक मिश्रा, आचार्य इंदु प्रकाश मिश्र, डॉ. सतीश शर्मा, प्रो. पवन सिन्हा, के. लेखराज शर्मा, डॉ. हेमचंद्र पाण्डेय, आचार्य रमेश सेमवाल, आचार्य शैलेन्द्र पाण्डेय, पं. राहुल राज, आचार्य सुभेश शर्मा, डॉ. घनश्याम ठाकुर, आचार्य अविनाश राय, पं. आर.के. शर्मा, वास्तुविद अंकिता झुनझुनवाला, डॉ. संजीव श्रीवास्तव, आचार्य आनंद पाण्डेय, पं. पंकज त्रिवेदी उपमन्यु, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष बबन शर्मा, वरिष्ठ भाजपा नेता विजय सोनी आदि उपस्थित रहे। कार्यक्रम आयोजक आचार्य के.एम. दुबे पद्मेश एवं सिद्धार्थ दुबे ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
