नशामुक्त भारत के लिए केन्द्र सरकार का बड़ा कदम, गायत्री परिवार के साथ मिलकर चलाएगी देशव्यापी जनजागरण अभियान

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देश को नशे के चंगुल से मुक्त कराने और युवा पीढ़ी को एक सकारात्मक दिशा देने के लिए केंद्र सरकार ने एक बेहद बड़ा और सराहनीय कदम उठाया है। सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने भारत को पूरी तरह से नशामुक्त बनाने के उद्देश्य से विश्व प्रसिद्ध आध्यात्मिक व सामाजिक संस्था ‘अखिल विश्व गायत्री परिवार’ के साथ हाथ मिलाया है। इस ऐतिहासिक साझेदारी के तहत अब देशव्यापी स्तर पर एक व्यापक जनजागरण अभियान चलाया जाएगा, जिससे करोड़ों लोगों को नशे के खिलाफ जागरूक किया जा सके।

केंद्र सरकार और गायत्री परिवार के बीच समझौता

विश्व मादक द्रव्य दुरुपयोग एवं अवैध तस्करी निरोधक दिवस के अवसर पर सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा आयोजित नशा मुक्त भारत सप्ताह का समापन शुक्रवार को देवसंस्कृति विश्वविद्यालय हरिद्वार में हुआ। इस अवसर पर भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय तथा अखिल विश्व गायत्री परिवार के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन साइन किया। इस समझौते के अंतर्गत दोनों संस्थाएं मिलकर देशभर में मादक द्रव्यों के दुरुपयोग एवं अवैध तस्करी के विरुद्ध व्यापक जनजागरण अभियान संचालित करेंगी। इस मौके पर अखिल विश्व गायत्री परिवार के दो हजार से अधिक स्वयंसेवकों एवं साधकों ने नशा मुक्त भारत के संकल्प के साथ विशाल जनजागरण रैली निकाली। इस रैली में युवाओं, महिलाओं, विद्यार्थियों एवं विभिन्न राज्यों से आए प्रतिनिधियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हुए नशामुक्त समाज के निर्माण का संदेश दिया।

सरकार और गायत्री परिवार का साझा संकल्प
इस अभियान का मुख्य उद्देश्य केवल नशे के व्यापार को रोकना नहीं, बल्कि समाज की मानसिकता को बदलना है। सरकार का मानना है कि केवल कानूनों के भरोसे नशे की समस्या को खत्म नहीं किया जा सकता, इसके लिए एक जन-आंदोलन की जरूरत है। गायत्री परिवार के संस्कार और नैतिक शिक्षा इस आंदोलन की रीढ़ बनेंगे। नशा केवल एक व्यक्ति को नहीं, बल्कि पूरे परिवार और देश के भविष्य को बर्बाद करता है। सरकार और गायत्री परिवार का यह साझा प्रयास देश के युवाओं को व्यसनों से दूर कर राष्ट्र निर्माण की ओर मोड़ने में मील का पत्थर साबित होगा।”

सभा को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेन्द्र कुमार ने कहा कि नशा केवल व्यक्ति को ही नहीं, बल्कि पूरे परिवार और समाज को खोखला कर देता है। इसे समाप्त करने के लिए केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि समाज की आध्यात्मिक एवं सामाजिक संस्थाओं की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। अखिल विश्व गायत्री परिवार के साथ हुआ यह समझौता नशामुक्त भारत अभियान को जन-जन तक पहुँचाने में मील का पत्थर सिद्ध होगा।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने कहा कि नशा मुक्ति की शुरुआत व्यक्ति के भीतर आत्मविश्वास की चिंगारी भरकर करने से होती है। उन्होंने कहा कि हमें अपने परिवार, समाज, राज्य और राष्ट्र को नशे जैसी सामाजिक बुराई से मुक्त बनाने के लिए सामूहिक प्रयास करने होंगे। डॉ. पण्ड्या ने कहा कि भारत की महान सांस्कृतिक परंपराएं संयम, सदाचार और आत्मानुशासन की प्रेरणा देती हैं। आज हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है कि व्यसन की गिरफ्त में आए करोड़ों लोगों को नशामुक्त जीवन की ओर प्रेरित करें और उनमें स्वस्थ, सकारात्मक एवं राष्ट्रनिर्माण की भावना का संचार करें। उन्होंने स्वयं नशा न करने तथा कम से कम एक व्यक्ति को नशा छोड़ने के लिए प्रेरित करने का संकल्प लेने हेतु प्रेरित किया। परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने दुर्व्यसन से दूर रहने हेतु अपील की।