अयोध्या के राम मंदिर के करोड़ों रुपए के चढ़ावा में कथित चोरी के विवाद में बड़ी जानकारी सामने आई है. एक ओर SIT(Special Investigation Team) की जांच और 8 लोगों की गिरफ्तारी हुई है, तो दूसरी तरफ श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया. दोनों पर अभी तक FIR दर्ज नहीं हुआ था, लेकिन जांच उनकी प्रशासनिक कामकाज तक पहुंच चुकी है और अब उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. आइए विस्तार से जानते हैं क्या है इसीफे की इनसाइड स्टोरी.
विपक्ष लगातार साध रहा था निशाना!
जैसे ही कल 8 लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया, तब से ही विपक्षी पार्टियां जैसे सपा और आम आदमी पार्टी ने निशाना साधना शुरू कर दिया. उन्होंने आरोप लगाया कि चंपत राय और अनिल मिश्रा, जो पूरे चंदे और चढ़ावा मैनेजमेंट के मुखिया थे, उन्हें इस घोटाले की जानकारी कैसे नहीं हो सकती है. विपक्षी नेताओं का साफ कहना था कि जब तक यह दोनों अपनी कुर्सियों पर बैठे रहेंगे, तब तक जांच निष्पक्ष नहीं हो सकता है. साथ ही यह कार्रवाई करके सिर्फ छोटी मछलियों को बलि का बकरा बनाया गया और बड़ी मछलियों को बचाने की साजिश रची जा रही है.
चंपत राय के पास क्या थी जिम्मेदारी?
ऐसे में एक सवाल उठता है कि आखिर चंपत राय कौन हैं और उनके पास क्या जिम्मेदारी थी? तो चंपत राय विश्व हिंदू परिषद यानी VHP के वरिष्ठ नेता है और राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव है. उनके पास प्रशासनिक ढांचे, वित्तीय व्यवस्था, भूमि संबंधी मामलों और मंदिर की रोजाना व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी थी. राम मंदिर आंदोलन से लेकर मंदिर निर्माण तक उनकी भूमिका बेहद अहम रही है.
