जानें वृद्धावस्था में पेट साफ न होने के मुख्य कारण और इसका सटीक समाधान

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लखनऊः साठ-बासठ वर्ष की आयु के बाद अधिकांश लोगों को उम्र के प्रभाव का एहसास होने लगता है। पहले जैसी फुर्ती नहीं रहती, घुटने कमजोर पड़ने लगते हैं, दृष्टि कम होने लगती है और दांत भी जर्जर हो जाते हैं। कब्ज की समस्या बढ़ जाती है, पेट ठीक से साफ नहीं होता और शौचालय में अधिक समय बिताना पड़ता है। प्रोस्टेट बढ़ने से पेशाब की धार कमजोर हो जाती है तथा जलन और संक्रमण की शिकायत होने लगती है। कई लोगों को चलते समय चक्कर आते हैं। गर्दन की हड्डियों में बदलाव के कारण मस्तिष्क तक रक्त प्रवाह प्रभावित हो सकता है। इसके साथ कमर, गर्दन और बाजुओं में दर्द भी सामान्य हो जाता है, जिससे जीवन की गुणवत्ता प्रभावित होती है।

कहां है समस्याओं की जड़

एक महत्वपूर्ण बात यह है कि इन नई परेशानियों के अतिरिक्त उच्च रक्तचाप, डायबिटीज, हृदय रोग, कैंसर, अल्सर या अन्य रोगों के लिए व्यक्ति पहले से ही उपचार ले रहा होता है। दिनभर में कई दवाइयां भी खानी पड़ती हैं। ऐसे में प्रश्न उठता है कि कब्ज, पेशाब की शिकायत और जोड़ों के दर्द के पीछे मुख्य कारण क्या है? ध्यान से देखने पर स्पष्ट होता है कि इनमें से अधिकांश समस्याएं हमारी खराब जीवनशैली से जुड़ी हैं। यह जीवनशैली किशोरावस्था से प्रारंभ होकर युवावस्था और प्रौढ़ावस्था तक चलती रहती है। प्रारंभ में शरीर किसी प्रकार इसे सहन कर लेता है, लेकिन समय के साथ विभिन्न अंगों के कल-पुर्जे घिसने लगते हैं। उनमें सूजन, दाह और प्रदाह उत्पन्न होता है। झिल्लियों पर घाव बनने लगते हैं और उनके ऊपर साइटोकाइन तथा कोलेस्ट्रॉल जैसे विजातीय पदार्थ जमा होने लगते हैं। लगातार टूट-फूट और प्रदाह के कारण बड़ी आंत, मल-पथ, मूत्र-पथ तथा हड्डियों के जोड़ अपनी कार्यक्षमता खोने लगते हैं। बड़ी आंत से मल निकलने की प्रक्रिया शिथिल पड़ जाती है। प्रोस्टेट वृद्धि के कारण मूत्र-पथ में अवरोध होने लगता है, जिससे संक्रमण की संभावना बढ़ जाती है। जोड़ों की क्षमता भी कम होने लगती है और उन्हें सहारे की आवश्यकता महसूस होने लगती है।

क्या हैं परेशानियां

इस उम्र में चलने की रफ्तार तथा घुटनों की समस्या के अतिरिक्त शरीर के अन्य भागों में भी अनेक प्रकार की परेशानियां घेर लेती हैं। ये वे शिकायतें होती हैं, जो पहले भी थोड़ी-बहुत थीं, लेकिन काम के बोझ के चलते उतनी अनुभव नहीं होती थीं। अब जब व्यक्ति अपेक्षाकृत खाली रहता है और घर तक सीमित हो जाता है, तो ये समस्याएं अधिक बढ़ी हुई प्रतीत होती हैं।

एक मुसीबत हो, तो उससे निपटा जा सकता है, लेकिन जब कब्ज, पेशाब में जलन और घुटनों-कमर का दर्द एक साथ घेर लें, तो सामान्य जीवन दूभर हो जाता है। इन बीमारियों का ऐसा चक्रव्यूह बन जाता है कि व्यक्ति न ठीक से चल सकता है, न घूम-फिर सकता है। सुनने में ये शिकायतें साधारण लगती हैं, परंतु बढ़ती उम्र में जीवन की गुणवत्ता पर इनका गहरा प्रभाव पड़ता है। मन का उत्साह, ऊर्जा और आनंद प्रभावित हो जाते हैं।