श्रृंगवेरपुर घाट पर दफन लाशों के मामले में प्रयागराज डीएम को हटाया; बहराइच, कौशांबी के भी DM बदले

UP

(www.arya-tv.com)उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने शनिवार को 6 आईएएस अफसरों के तबादले किए हैं। श्रृंगवेरपुर घाट पर दफन करीब पांच हजार शवों के कफन हटाने के बाद मचे बवाल पर शासन ने प्रयागराज डीएम भानुचंद्र गोस्वामी का तबादला कर दिया है। इस मामले में सरकार की खासी फजीहत हुई थी। गोस्वामी को यूपी ग्रामीण सड़क अभियंत्रण का सीईओ बनाया गया है। अब 2010 बैच के आईएएस संजय कुमार खत्री को संयुक्त प्रबंध निदेशक जल निगम से डीएम प्रयागराज बनाया गया है। इसी के साथ कौशांबी और बहराइच डीएम का भी तबादला कर दिया है।

सुजीत कुमार कौशांबी और दिनेश चंद्र बहराइच डीएम बने

  • 2010 बैच के आईएएस सुजीत कुमार यूपी ग्रामीण सड़क अभियंता के सीईओ के पद पर तैनात थे, उन्हें कौशांबी का डीएम बनाया गया है।
  • डीएम कौशांबी रहे 2011 बैच के आईएएस अमित कुमार सिंह को विशेष सचिव नगर विकास बनाया गया है। इसके साथ ही संयुक्त प्रबंध निदेशक जल निगम का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।
  • 2012 बैच के आईएएस दिनेश चंद्र विशेष सचिव सांस्कृतिक विभाग में तैनात थे, उन्हें डीएम बहराइच बनाया गया है। बहराइच डीएम रहे शंभू कुमार को विशेष सचिव माध्यमिक शिक्षा बनाया गया है।

श्रृंगवेरपुर में शवों से कफन हटाने के मामले में सरकार की हुई थी फजीहत
चर्चा है कि प्रयागराज के श्रृंगवेरपुर में गंगा किनारे एक किलोमीटर के दायरे में चार से पांच हजार शवों के दफनाए जाने और उनकी संख्या छिपाने के लिए शवों के ऊपर से चुनरी, कफन और रामनामी हटाने से हुई योगी सरकार की फजीहत का खामियाजा डीएम भानुचंद्र गोस्वामी को भुगतना पड़ा। भानुचंद्र गोस्वामी ठीक से हैंडल नहीं कर पाए और इससे नाराज सरकार ने उन्हें साइडलाइन कर दिया। भानुचंद्र गोस्वामी 2009 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। प्रयागराज के जिलाधिकारी बनने से पूर्व वो प्रयागराज विकास प्राधिकरण के वीसी रहे हैं।

श्रृंगवेरपुर मामले  में  यह मामला देश-विदेश के मीडिया में छाया रहा। इससे योगी सरकार की काफी किरकिरी हुई। जब शासन ने जिला प्रशासन पर दबाव बनाया और पूछताछ शुरू की तो आनन-फानन में शवों की संख्या छिपाने के लिए शवों के ऊपर से डाली गई रामनामी, कफन, चुनरी आदि को हटवा दिया गया। इसकी जब तस्वीरें और वीडियो वायरल हुई तो सरकार की और फजीहत होने लगी थी।

हाईकोर्ट में कैजुअल ड्रेस पहनने पर उठानी पड़ी थी शर्मिंदगी

एक बार जिलाधिकारी भानुचंद्र गोस्वामी को ड्रेस कोड का पालन न करना भारी पड़ा। जजों की आपत्ति के चलते न सिर्फ उनको शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा बल्कि, समारोह से उनको लौटा दिया गया। बाद में ड्रेस कोड में वह पहुंचे ओर समारोह में शामिल हो पाए। वे संग्रहालय भवन के शिलान्यास कार्यक्रम में पहुंचे थे। समारोह में सर्वोच्च न्यायालय के जज न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति विनीत सरन के अलावा मुख्य न्यायाधीश गोविंद माथुर और हाईकोर्ट के अधिकांश जज मौजूद थे। जिलाधिकारी समारोह में सामान्य पैंट शर्ट पहनकर पहुंच गए। उनके पहनावे को ड्रेस कोड के विपरीत होने के कारण जजों ने आपत्ति की। उन्हें सही ड्रेस पहनकर आने को कहा गया। गोस्वामी को समारोह से वापस कर दिया गया और उन्हें तभी कार्यक्रम में शामिल होने दिया गया जब वह ड्रेस कोड के अनुसार टाई, कोट और पैंट में दोबारा आए।

डीएम की पत्नी ने चपरासी को जड़ दिया था थप्पड़
2019 में भानुचंद्र गोस्वामी प्रयागराज विकास प्राधिकरण के वीसी थे। उन दिनों उनकी पत्नी ने प्रयागराज विकास प्राधिकरण के चपरासी को अपने घर में थप्पड़ जड़ दिया था। इस घटना का कर्मचारी संगठनों ने कड़ा विरोध दर्ज कराया था। इस प्रकरण में गोस्वामी की काफी किरकिरी हुई थी।

ट्रांसफर के संबंध में कोई भी आदेश सार्वजनिक नहीं किया
नियुक्ति विभाग ने आईएएस के ट्रांसफर के संबंध में कोई आदेश सार्वजनिक नहीं किया है। न ही नियुक्ति विभाग की वेबसाइट पर अपलोड किया गया है। आदेश की कॉपी सीधे संबंधित अधिकारी और कार्यालय को भेजी जा रही है। बीते एक साल में ऐसा कई बार देखा गया है कि नियुक्ति विभाग के द्वारा देर रात अधिकारियों के ट्रांसफर कर उन्हें नई तैनाती दी जा रही है। लेकिन उनके आदेशों को मीडिया व अन्य प्लेटफार्म पर सार्वजनिक नहीं किया जा रहा है।