यह जानबूझकर किया जा रहा है…वक्फ कानून को खत्म करने संबंधी निजी विधेयक पर किसने क्या कहा

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(www.arya-tv.com) राज्यसभा में शुक्रवार को वक्फ बोर्ड अधिनियम 1995 को निरस्त करने संबंधी एक निजी विधेयक पेश किया गया। विपक्षी सदस्यों की ओर से विरोध किए जाने पर मत विभाजन किया गया और विधेयक के पक्ष में 53 वोट मिलने के बाद उसे सदन में पेश किया गया।

बीजेपी सांसद हरनाथ सिंह यादव ने वक्फ बोर्ड अधिनियम 1995 को निरस्त करने के लिए वक्फ बोर्ड निरसन विधेयक 2022 सदन में पेश करने की अनुमति मांगी। यादव ने वक्फ बोर्ड अधिनियम 1995 को समाज में वैमनस्य बढ़ाने वाला और अपनी शक्तियों का दुरुपयोग करने वाला कानून बताते हुए कहा कि इसे निरस्त करने के लिए वह सदन में एक निजी विधेयक पेश करना चाहते हैं।

इस पर सदन में मौजूद ज्यादातर विपक्षी सदस्यों ने विरोध जताया और सभापति जगदीप धनखड़ से इस निजी विधेयक को सदन मे पेश करने की अनुमति नहीं देने की मांग की। सभापति धनखड़ ने कहा कि आईयूएमएल सदस्य अब्दुल वहाब और माकपा के इलामारम करीम ने इस निजी विधेयक का विरोध करते हुए नोटिस दिया है।
वहाब सदन में नहीं थे। इलामारम करीम ने कहा हमारी पार्टी के अन्य सदस्यों ने भी इसके विरोध में राय जाहिर की है। वक्फ संपत्ति हमारा अधिकार है और इसका अन्य समुदायों से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने इसे आस्था से जुड़ा मुद्दा बताते हुए कहा कि इस संवेदनशील मुद्दे को छूना ही नहीं चाहिए।

इसी पार्टी के जॉन ब्रिटास ने कहा कि वह इस विधेयक को पेश किए जाने का विरोध करते हैं, जिसका उद्देश्य समाज में वैमनस्य पैदा करना और ध्रुवीकरण है।

माकपा सदस्य संदोष कुमार पी ने कहा कि वक्फ को लेकर एक स्थापित परंपरा है जिससे अन्य समुदायों का कोई सरोकार नहीं है और यह निजी विधेयक इस स्थापित परंपरा को जानबूझकर छेड़ने का प्रयास है।