कभी नही भुलाया जा सकता बंटवारे का दर्द : भूपेंद्र चौधरी

Lucknow
  • 14 अगस्त को था भारतीय इतिहास का काला दिन

लखनऊ । भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष भूपेन्द्र सिंह चौधरी ने पार्टी मुख्यालय पर कहा कि देश के बंटवारे के दर्द को कभी भुलाया नहीं जा सकता। 14 अगस्त भारतीय इतिहास काला दिवस था। नफरत और हिंसा ने लाखों लोगों को अपने घर से विस्थापित किया और लाखों की संख्या में जाने चली गई। आजादी के इतिहास में 14 अगस्त को आंसुओ से लिखकर रक्त रंजित कर दी गई। देश का विभाजन हो गया। हम भारतीयों को इस दिन को याद रखने की जरूरत है, क्योंकि हमारी लाखों बहनें और भाई विस्थापित हो गए थे और कई लोगों ने बेवजह नफरत के कारण अपनी जान गंवा दी थी, उन्हें विभाजन के दौरान यातना-पूर्ण व्यवहार और हिंसा का सामना करना पड़ा था।

1857 के स्वातंत्र्य समर से धधकी राष्ट्रवाद की ज्वाला ने अग्रेजों को सिंहासन के नीचे दबे ज्वालामुखी को अहसास करा दिया था और यहीं से अंग्रेजों की फूट डालो और राज करो की नीति प्रारम्भ हुई।30 दिसम्बर 1906 को घोर साम्प्रदायिक संगठन मुस्लिम लीग का गठन हुआ। मुस्लिम लीग ने अपने जन्म से ही पृथकतावादी नीति को अपनाया तथा भारत में लोकतांत्रिक संस्थाओं का विरोध किया। 1939 में मुस्लिम लीग ने देश में व्यापक दंगे करवाए। लाहौर में 1940 में मुस्लिम लीग का सम्मेलन हुआ जिसमें उन्होंने दो राष्ट्र के सिद्धान्त का प्रतिपादन किया। मुस्लिम लीग ने साफ तौर पर यह घोषणा कर दी कि वह अलग देश चाहते हैं। मुस्लिम लीग द्वारा डायरेक्ट एक्शन डे के तहत देश में दंगे और उन्माद फैलाया गया और देश में हत्या, लूट, आगजनी व दुराचार का दौर शुरू हो गया। अखंड हिन्दुस्तान की खंडित स्वतंत्रता जब देश की दहलीज पर खड़ी थी उसी समय पूर्वी और पश्चिमी सीमाओं पर प्रचंड नरसंहार चल रहा था। लाहौर से, पठानकोट से और बंगाल से लाखों संपन्न परिवार शरणार्थी के रूप में इस खंडित भारत के अंदर धीरे-धीरे आगे बढ़ते जा रहे थे। दिल्ली के मंदिर मार्ग पर हो रही सभा में बंगाल से आए न्यायमूर्ति निर्मल चन्द्र चटर्जी ने कहा था कि 3 जून को ब्रिटिश सरकार द्वारा दिया गया विभाजन का प्रस्ताव स्वीकार कर कांग्रेस ने न केवल बहुत बड़ी गलती की है वरन करोड़ों भारतीयों की पीठ में छुरा भी घोंपा है। भारत का विभाजन स्वीकार करने का अर्थ यह है कि कांग्रेस ने मुस्लिम लीग की गुंडागर्दी के सामने पराजय स्वीकार कर ली।

 अंग्रेजों ने सदैव फूट डालो और राज करो की नीति अपनाई थी। कांग्रेस ने भी वहीं नीति अपनाई और उसका अनुसरण उनके मानसपुत्र आज भी कर रहे हैं। उन्होंने भारत के नागरिकों को अलग-अलग समूहों में विभाजित किया। नेहरू लियाकत समझौते के 6 माह बाद पाकिस्तान के पहले कानून मंत्री जोगेन्द्र नाथ मंडल ने अपना इस्तीफा दे दिया था। जोगेन्द्र नाथ मंडल ने लिखा कि 16 अगस्त 1946 को मुस्लिम लीग द्वारा द डायरेक्ट एक्शन डे मनाया गया। यह एक प्रलय में तब्दील हुआ।भूपेंद्र चौधरी ने कहा कि डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने यह अनुभव किया था कि कांग्रेस हर हालत में मुस्लिम लीग को प्रसन्न करने में जुटी हुई थी। वह उनकी अनुचित मांगों को भी स्वीकार करने के लिए किसी भी सीमा तक नतमस्तक होकर समझौते के लिए तैयार हो जाती थी।

देश के विभाजन के समय हिंसा, घृणा, अमानवीयता व क्रूरता से विस्थापित भाई, बहनों के संघर्ष व बलिदान की स्मृति में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस मनाने के संवेदनशील निर्णय पर प्रधानमंत्री जी का अभिनंदन करता हूं। हमें विभाजन की विभीषिका को सदैव स्मृति में रखना है, जिससे विभाजन और इसके कारण हुई परिस्थितियां -जैसे तुष्टिकरण की राजनीति, विभाजनकारी ताकतों के विचारों को हावी होने देना और लोगों को नुकसान पहुंचाने वाली सोच के साथ खड़ा होना, जैसी स्थितियां फिर कभी नहीं होनी चाहिए।विभाजन को एक सबक के रूप में लेना चाहिए ताकि भारत ‘अतीत की गलतियों‘ को न दोहराए और देश तुष्टीकरण का रास्ता न अपनाए, खासकर जब हमारे पड़ोस में अस्थिरता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई हो।भारत की वर्तमान और भावी पीढ़ियों को देश के विभाजन के दौरान लाखों भाई-बहनों द्वारा झेली गई यातना और वेदना को याद दिलाने के लिए 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के रूप में के रूप में मनाया जाएगा।पार्टी जिला स्तर पर आयोजित प्रदर्शनियों में देश के विभाजन की त्रासदी को चित्रों, अभिलेखों तथा चलचित्रों के माध्यम से नागरिकों के बीच प्रदर्शित करेगी।