स्वच्छ एवं हरित विद्यालय रेटिंग में राष्ट्रीय स्तर पर परचम लहराने और मुख्यमंत्री से सम्मानित होने वाला प्राथमिक विद्यालय दौतरा आज प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार है। रायबरेली जनपद के महराजगंज विकास खंड का यह इकलौता विद्यालय स्वच्छता के मामले में नजीर माना जाता है, लेकिन इसके ठीक सामने मुख्य मार्ग पर पसरा कीचड़ और पानी इसकी चमक को धूमिल कर रहा है।
वर्षों पुराना खड़ंजा धंसा, रास्ता बना मुसीबत
प्राथमिक विद्यालय के सामने वर्षों पहले बिछाया गया खड़ंजा पूरी तरह जर्जर होकर नीचे धंस चुका है। मानसून की बारिश होते ही गांव के मुख्य मार्ग पर लगभग 200 मीटर के दायरे में कीचड़ और गहरा जलभराव हो जाता है। इस कारण स्कूल में पढ़ने वाले 145 बच्चों को जान जोखिम में डालकर या कीचड़ में सने पैरों के साथ स्कूल जाना पड़ रहा है। विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक आशीष सिंह ने चिंता जताते हुए बताया, “राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना चुके हमारे विद्यालय में जलभराव की वजह से बरसात के दिनों में बच्चों की उपस्थिति काफी कम हो जाती है। बच्चे रास्ते में गिर जाते हैं और उनके कपड़े खराब हो जाते हैं।”
शिकायतों का पुलिंदा, लेकिन कागजों तक सीमित समाधान
क्षेत्र पंचायत सदस्य रोहित का कहना है कि उन्होंने इस समस्या को लेकर खंड विकास अधिकारी (BDO), परियोजना अधिकारी (PD), मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल और जिलाधिकारी तक को दर्जनों शिकायतें भेजीं, लेकिन अब तक कोई जमीनी समाधान नहीं निकला। हैरानी की बात यह है कि बीडीओ की रिपोर्ट में भी यह स्वीकार किया गया है कि खड़ंजा जर्जर है और वहां जलभराव की गंभीर स्थिति रहती है, फिर भी फाइलें आगे नहीं बढ़ सकीं।
कई गांवों का मुख्य संपर्क मार्ग
ग्रामीणों के अनुसार, यह सिर्फ स्कूल का रास्ता नहीं है, बल्कि संतोषपुर, पहरेमऊ, बरेंदा, जनई और राजाका पुरवा जैसे दर्जनों गांवों को जोड़ने वाला मुख्य मार्ग है। यदि सड़क के किनारे जलनिकास के लिए एक पक्की नाली का निर्माण करा दिया जाए, तो जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान हो सकता है।
ग्राम प्रधान का दावा
मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए ग्राम प्रधान मोनू पासी ने बताया कि रास्ते की मरम्मत और निर्माण के लिए प्रस्ताव पास कर लिया गया है। जैसे ही बरसात का मौसम खत्म होगा, निर्माण कार्य शुरू करवा दिया जाएगा। अब देखना यह होगा कि राष्ट्रीय मंच पर जिले का मान बढ़ाने वाले इस विद्यालय और स्कूली बच्चों को इस मुसीबत से कब तक निजात मिलती है।
