लखनऊ विकास प्राधिकरण सुलतानपुर रोड स्थित आईटी सिटी और वरुण विहार योजना में लैंड पूलिंग नीति के तहत रुचि न दिखाने वाले किसानों की जमीन अधिग्रहण करेगा। इन किसानों को योजना में विकसित भूखंड भी नहीं मिलेंगे। प्राधिकरण जल्द अधिग्रहण करके योजना को विकसित करेगा। अब तक 3490 एकड़ की आवासीय योजनाओं में 50 फीसद भूमि किसानों से लैंड पूलिंग के तहत ली जा चुकी है। जिन्हें इन्हीं योजनाओं में प्राथमिकता से विकसित भूखंड दिए हैं।
उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने बताया कि करीब 1600 एकड़ भूमि आवासीय योजना के लिए मिल चुकी है। 800 एकड़ भूमि देने के लिए किसान लैंड पूलिंग नीति के तहत आगे नहीं आ रहे हैं। ऐसे में भूमि का अधिग्रहण करेंगे। ग्रामीण क्षेत्र में सर्किल रेट का चार गुना व शहरी क्षेत्र में दाेगुना धनराशि दी जाएगी। लैंड पूलिंग नीति के तहत कई किसानों ने आवेदन किए हैं जो स्वीकार करके उनकी जमीन ली जाएगी और उन्हें योजना में विकसित भूखंड मिलेंगे। किसानों की सहमति से जमीन लेने के बाद आगे अधिग्रहण पर काम करेंगे। वहीं, 1450 एकड़ की वरुण विहार आवासीय योजना में 750 एकड़ जमीन लैंड पूलिंग से ले चुके हैं। 100 एकड़ सरकारी भूमि अधिग्रहित करेंगे।
अब अंसल मामले की 8 अक्टूबर को सुनवाई
सुशांत गोल्फ सिटी अंतर्गत अंसल एपीआई की हाईटेक टाउनशिप मामले की अब 8 अक्टूबर को राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण (एनसीएलटी) में सुनवाई होगी। पहले 15 अक्टूबर की तारीख दी गई थी। सुनवाई में एलडीए हाईटेक टाउनशिप को टेकओवर करके अधूरी परियोजना को विकसित करने का प्रस्ताव रखेगा। जो कैबिनेट में स्वीकृत हो चुका है। इस पर यदि एलडीए के पक्ष में निर्णय हुआ तो योजना में फंसे पांच हजार खरीदारों को उनके भूखंड मिलेंगे। साथ ही योजना का विकास एलडीए नये सिरे से कराएगा।
क्या होती है लैंड पूलिंग
लैंड पूलिंग नीति किसानों/भू-स्वामियों की जमीन को एक साथ लेकर उस पूरे क्षेत्र का सुनियोजित विकास करना। जैसे सड़क, नाली, बिजली, पार्क, आवासीय या व्यावसायिक क्षेत्र आदि विकसित करना। यूपी में इसका उद्देश्य शहरी और औद्योगिक परियोजनाओं के लिए जमीन जुटाने का एक विकल्प तैयार करना है। मान लीजिए 100 किसानों की जमीन किसी प्रस्तावित टाउनशिप के इलाके में है। पारंपरिक अधिग्रहण में सरकार जमीन लेकर मुआवजा देती है। लैंड पूलिंग में जमीन मालिकों की जमीन को एक पूल में शामिल करके उसका विकास किया जाता है और नीति के अनुसार विकसित भूमि का एक हिस्सा वापस भू-स्वामियों को दिया जा सकता है।
