कलेक्ट्रेट सभागार में डीएम अंकित खंडेलवाल के निर्देशन और अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व सत्यप्रिय सिंह की अध्यक्षता में जनगणना-2027 के द्वितीय चरण यानी जनसंख्या गणना को लेकर जिला स्तरीय जनगणना समन्वय समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में जनगणना निदेशालय लखनऊ से आए उप निदेशक जनगणना डॉ. गौरव पांडेय ने जनगणना की तैयारियों, प्रक्रिया, प्रगणकों एवं पर्यवेक्षकों की जिम्मेदारियों और डिजिटल आंकड़ा संग्रहण की जानकारी दी।
उप निदेशक जनगणना ने बताया कि जनगणना एक संवैधानिक एवं वैधानिक गतिविधि है, जो संविधान के अनुच्छेद 246 की संघ सूची तथा जनगणना अधिनियम-1948 के तहत संचालित की जाती है। जनगणना-2027 वर्ष 1872 से देश की 16वीं और स्वतंत्रता के बाद आठवीं जनगणना होगी। उन्होंने कहा कि जनगणना की पूरी प्रक्रिया में प्रगणक और पर्यवेक्षकों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। बताया कि जनगणना-2027 का द्वितीय चरण यानी जनसंख्या गणना एक दिसंबर 2026 से चार जनवरी 2027 तक चलेगी। इसके बाद पांच जनवरी से नौ जनवरी 2027 तक रिवीजन का कार्य किया जाएगा। इस अवधि में गणना के दौरान दर्ज किए गए विवरणों का सत्यापन किया जाएगा और आवश्यकता के अनुसार संशोधन किए जाएंगे। डॉ. गौरव पांडेय ने बताया कि इस बार जनगणना प्रक्रिया में डिजिटल माध्यम से आंकड़े एकत्र करने पर विशेष जोर दिया गया है।
मोबाइल ऐप के माध्यम से आंकड़ा संग्रहण किया जाएगा। साथ ही पहली बार लोगों को स्व-गणना की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। इसके माध्यम से लोग निर्धारित प्रक्रिया के तहत स्वयं अपना विवरण उपलब्ध करा सकेंगे। इस बार परिवार के सदस्यों से संबंधित विभिन्न पहलुओं को लेकर कुल 40 प्रश्न पूछे जाएंगे। इनमें व्यक्ति का नाम, साक्षरता, डिजिटल साक्षरता, आर्थिक एवं गैर-आर्थिक कार्यकलाप सहित विभिन्न प्रकार की जानकारी शामिल होगी। बैठक में जनगणना अधिनियम की विभिन्न धाराओं के बारे में भी जानकारी दी गई। उप निदेशक ने बताया कि अधिनियम की धारा आठ और नौ के तहत प्रगणकों एवं पर्यवेक्षकों को मकानों में प्रवेश करने, मकानों पर नंबर अंकित करने और जनगणना से संबंधित प्रश्न पूछने का अधिकार है। आंकड़ों की गोपनीयता के संबंध में बताया कि जनगणना अधिनियम की धारा 15 के तहत जनगणना से संबंधित रिकॉर्ड और आंकड़े पूरी तरह गोपनीय होते हैं। अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व सत्यप्रिय सिंह ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जनगणना के दौरान किसी भी व्यक्ति से किसी प्रकार का दस्तावेज नहीं मांगा जाएगा। व्यक्ति की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी के आधार पर ही जनगणना प्रपत्र में विवरण दर्ज किया जाएगा।
