अंतरिक्ष विज्ञान से लेकर श्रीमद्भागवत गीता, एआई, मशीन लर्निंग, साइबर सिक्योरिटी, पौरोहित्य, वास्तुशास्त्र और वाइल्ड लाइफ जैसे विषयों में नए पाठ्यक्रम शुरू कर लखनऊ विश्वविद्यालय शैक्षिक क्षेत्र में बड़ा बदलाव करने जा रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने घोषणा की है कि नए सत्र से ऐसे कई पाठ्यक्रम आरंभ होंगे, जो उत्तर भारत के विश्वविद्यालयों में पहली बार शुरू किए जा रहे हैं। कुलपति प्रो. जेपी सैनी ने शैक्षणिक, प्रशासनिक और अधोसंरचनात्मक सुधारों की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत की।
विश्वविद्यालय में 11 नए स्नातक, 10 स्नातकोत्तर और 22 माइनर डिग्री कार्यक्रमों की शुरुआत की गई है। इसके साथ ही पांच सह-पाठ्यक्रम और व्यावसायिक पाठ्यक्रम भी जोड़े गए हैं। इन सभी पाठ्यक्रमों को वर्तमान शैक्षणिक और औद्योगिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है, जिसमें रोजगारपरकता और अंतर्विषयक अध्ययन पर विशेष जोर दिया गया है। कुछ पाठ्यक्रमों में विषय की बाध्यता भी समाप्त की गई है, जिससे अलग पृष्ठभूमि के छात्र भी नए क्षेत्रों में प्रवेश ले सकेंगे।
माइनर डिग्री कार्यक्रम
नई शैक्षणिक संरचना के तहत माइनर डिग्री कार्यक्रमों का विस्तार किया गया है। छात्र अपने मुख्य पाठ्यक्रम के साथ अतिरिक्त योग्यता के रूप में माइनर डिग्री चुन सकेंगे। दूसरे वर्ष से इसे शुरू कर 20 क्रेडिट अपनी गति से पूरे किए जा सकते हैं। यह व्यवस्था बहुविषयक रुचि रखने वाले छात्रों के लिए लाभकारी मानी जा रही है।
प्रवेश प्रक्रिया और सीट वृद्धि
विश्वविद्यालय ने विभिन्न पाठ्यक्रमों में कुल 2326 सीटों की वृद्धि को मंजूरी दी है। पेशेवर पाठ्यक्रमों में प्रवेश राष्ट्रीय मानकों के अनुसार होगा। एलएलबी में प्रवेश कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट (क्लेट) से और एमबीए में प्रवेश कॉमन एडमिशन टेस्ट (कैट) के माध्यम से कराया जाएगा।
मूल्यांकन व परीक्षा सुधार
मूल्यांकन प्रणाली में सुधार के लिए एक समिति गठित की गई है, जो एब्सोल्यूट और रिलेटिव ग्रेडिंग सिस्टम लागू करने की संभावनाओं का अध्ययन करेगी। परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए सभी परीक्षाएं, जिनमें प्रायोगिक भी शामिल हैं, कैमरा निगरानी में कराई जाएंगी और उनकी रिकॉर्डिंग विश्वविद्यालय को सौंपी जाएगी। पुनः परीक्षा की स्थिति में नए केंद्र निर्धारित किए जाएंगे।
संबद्ध महाविद्यालयों का विकास व अधोसंरचना
संबद्ध महाविद्यालयों के विकास के लिए रोडमैप तैयार किया गया है। सरकारी और सहायता प्राप्त महाविद्यालयों से परामर्श किया जा चुका है, जबकि स्ववित्तपोषित संस्थानों के साथ बैठकें प्रस्तावित हैं। फोकस शोध अधोसंरचना, मान्यता परिणाम और संस्थागत रैंकिंग सुधार पर रहेगा। पारदर्शिता के लिए निरीक्षण और फैकल्टी चयन प्रक्रिया ऑनलाइन होगी।
निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए थर्ड-पार्टी मूल्यांकन कराया जाएगा। खाद्य निविदाओं में ब्रांड मानकीकरण किया गया है। छात्रों की बढ़ती मांग को देखते हुए तीन नए छात्रावास निर्माण के प्रस्ताव भी प्रस्तुत किए गए हैं।
नए पाठ्यक्रमों की झलक
स्नातक स्तर पर बीएससी कम्प्यूटेशनल एस्ट्रोफिजिक्स, अप्रेंटिसशिप एंबेडेड डिग्री, बीकॉम रिटेल मैनेजमेंट, ई-कॉमर्स, बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज, बीए में सांख्यिकी, अर्थशास्त्र, कंप्यूटर साइंस, बीसीए में एआई, मशीन लर्निंग, डाटा साइंस, साइबर सिक्योरिटी, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, बीए एलएलबी और होटल मैनेजमेंट जैसे पाठ्यक्रम शामिल हैं। परास्नातक स्तर पर एमएससी एआई, डाटा साइंस, साइबर सिक्योरिटी, एमएससी वाइल्ड लाइफ, एमए पौरोहित्य, वास्तुशास्त्र, पोषण विज्ञान, एमफार्मा तथा डिप्लोमा पाठ्यक्रमों में टूरिज्म और कल्चरल हेरिटेज समेत कई नए कार्यक्रम शुरू किए जा रहे हैं।
