किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) के ट्रॉमा सेंटर और लारी कार्डियोलॉजी विभाग में मरीजों की सुरक्षा और दलालों पर शिकंजा कसने के लिए किए गए इंतजामों की हकीकत सामने आने लगी है। लाखों रुपये खर्च कर लगाए गए सीसीटीवी कैमरे, निजी सुरक्षा एजेंसी के जवान और चौबीस घंटे तैनात पुलिसकर्मी भी दलालों के बढ़ते नेटवर्क को रोकने में नाकाम साबित हो रहे हैं। आलम यह है कि दलाल अस्पताल परिसर के भीतर तक पहुंचकर मरीजों और तीमारदारों को अपने जाल में फंसा रहे हैं।बुधवार रात सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो ने सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी। वीडियो में कथित तौर पर निजी अस्पताल से जुड़े दलाल एक मरीज को एंबुलेंस से ले जाते दिखाई दिए। यह कोई पहला मामला नहीं है, बल्कि लंबे समय से जारी इस खेल पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं।
ट्रॉमा सेंटर में रोजाना 300 से अधिक गंभीर मरीज पहुंचते हैं। 400 बेड वाले सेंटर में अधिकांश बेड हर समय भरे रहते हैं और कई बार मरीजों को स्ट्रेचर पर ही भर्ती करना पड़ता है। इलाज, जांच और दवाओं की जरूरत के बीच सक्रिय दलाल मरीजों और तीमारदारों को बेहतर इलाज, जल्द जांच और सस्ती दवा का झांसा देकर निजी अस्पतालों और जांच केंद्रों की ओर मोड़ देते हैं।
उधर, लारी कार्डियोलॉजी विभाग में भी हालात कम चिंताजनक नहीं हैं। यहां इमरजेंसी में प्रतिदिन करीब 250 और ओपीडी में 400 से अधिक मरीज पहुंचते हैं। दिल के गंभीर मरीजों और परेशान परिजनों की मजबूरी का फायदा उठाकर दलाल अपना नेटवर्क चला रहे हैं।
दलालों पर अंकुश लगाने के लिए ट्रॉमा सेंटर और लारी में पुलिस चौकियां स्थापित की गई हैं। चौबीसों घंटे पुलिसकर्मियों की तैनाती का दावा किया जाता है। इसके अलावा अस्पताल परिसर में निगरानी के लिए बड़ी संख्या में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं और निजी सुरक्षा एजेंसी पर हर महीने लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। बावजूद इसके, मरीजों को परिसर से बाहर ले जाने और निजी जांच व दवा केंद्रों तक पहुंचाने का खेल थमने का नाम नहीं ले रहा।
केजीएमयू के प्रवक्ता डॉ. केके सिंह का कहना है कि केजीएमयू प्रशासन समय-समय पर दलालों के खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई करता है। सुरक्षा गार्डों को भी अलर्ट किया गया है। मरीजों और तीमारदारों को भी दलालों के झांसे में न आने को लेकर जागरूक किया जाता है।
