पाकिस्‍तान की कंगाली से टेंशन में दोस्‍त तुर्की, एर्दोगान को कान फाइटर जेट के लिए तलाशने पड़ रहे पार्टनर

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(www.arya-tv.com) पाकिस्‍तान की कंगाली अब उसके दोस्‍त तुर्की के लिए बडे संकट का सबब बन गई है। दरअसल, तुर्की ने अपना पहला स्‍वदेशी फाइटर जेट TF-X बनाया है जिसे ‘कान’ नाम दिया गया है। इस फाइटर जेट की साल के आखिर में पहली उड़ान होनी है। तुर्की इस समय भयानक आर्थिक संकट से जूझ रहा है और उसने कान जेट को बनाने के लिए अजरबैजान तथा पाकिस्‍तान से हाथ मिलाया था। अजरबैजान एक तेल समृद्ध देश है और पैसा दे सकता है।

वहीं पाकिस्‍तान खुद ही दुनिया से कर्ज की भीख मांग रहा है, ऐसे में इस खर्चीले फाइटर जेट प्रोग्राम में कितनी मदद कर पाएगा, इसको लेकर तुर्की के राष्‍ट्रपति एर्दोगान टेंशन में आ गए हैं। यही वजह है कि अब एर्दोगान खुद ही फाइटर जेट प्रोगाम के लिए पार्टनर की तलाश में जुट गए हैं।डिफेंस न्‍यूज के मुताबिक तुर्की इस समय महंगाई की मार से बेहाल है और मार्च तक तुर्की का विदेशी कर्ज 467 अरब डॉलर तक पहुंच गया था।

पिछले 12 महीने में ही तुर्की पर 250 अरब डॉलर का कर्ज लद गया है। तुर्की के रक्षा व‍िश्‍लेषकों का कहना है कि देश की आर्थिक हालत को देखते हुए कान फाइटर जेट को अब वित्‍तीय संकट से गुजरना होगा। इसी संकट से निपटने के लिए तुर्की विदेशी पार्टनर तलाश रहा है ताकि व‍ित्‍तीय बोझ को कम किया जा सके। तुर्की और पाकिस्‍तान के बीच 14 अगस्‍त को इस फाइटर जेट के लिए समझौता होना था लेकिन यह हो नहीं सका।

पाकिस्‍तान संग मिलकर पश्चिमी देशों को टक्‍कर देने का था प्‍लान

विश्‍लेषकों के मुताबिक अजरबैजान के साथ जहां समझौता हो गया है, वहीं अन्‍य पार्टनर की तलाश है। पाकिस्‍तान अगर तुर्की के इस फाइटर जेट प्रोग्राम में शामिल होता है तो यह उसके लिए चीन के बेकार साबित हो रहे प्‍लेन जेएफ-17 के बाद दूसरा होगा। तुर्की सरकार ने अभी पाकिस्‍तान के भागीदारी के बारे में कोई ताजा बयान नहीं दिया है। पाकिस्‍तान एयर फोर्स ने भी कॉमेंट करने से इंकार कर दिया है।

व‍िश्‍लेषकों के मुताबिक कंगाल पाकिस्‍तान तकनीकी मदद तो कर सकता है लेकिन वह पैसा नहीं दे पाएगा जिसकी तुर्की को सख्‍त जरूरत है। कान फाइटर जेट पांचवीं पीढी का फाइटर जेट है और यह अगर सफल होता है तो पश्चिमी देशों के फाइटर जेट का व‍िकल्‍प साबित हो सकता है। तुर्की की सरकार इस विमान को 27 दिसंबर को उडाना चाहती है।

प्रोग्राम के मुताबिक तुर्की की वायुसेना को साल 2028 तक 20 के करीब TF-X विमान मिलेंगे। एक विमान की कीमत 10 करोड डॉलर होगी। यह कीमत साल 2029 तक और बढ सकती है। तुर्की की कंपनी हर महीने दो फाइटर जेट बनाकर जोरदार कमाई करने का इरादा रखती है। हालांकि पाकिस्‍तान की कंगाली ने उसकी मुश्किल बढा दी है।