जेवर: भारत के ग्लोबल इलेक्ट्रानिक्स पाउरहाउस बनने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। पीएम मोदी के आत्मनिर्भर भारत के विजन को ध्यान में रखते हुए यूपी के जेवर में एक बड़े शिलान्यास समारोह का आयोजन हुआ है। यमुना सिटी, जेवर में हुए इस कार्यक्रम में यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संयुक्त रूप से 6750 करोड़ रुपए के इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्यूफैक्चरिंग प्रोजेक्ट्स की नींव रखी।
एक बड़े आयातक होने के बाद, अब भारत इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के ‘दिमाग’ यानी प्रिंटेड सर्किट बोर्ड (PCB) के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ रहा है। यह ज़मीनी स्तर से एक पूरा सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम बनाने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दिखाता है।
गौरतलब है कि यमुना सिटी इलाके में हज़ारों करोड़ रुपये का निवेश आने से जेवर, उत्तर भारत की ‘सिलिकॉन वैली’ के तौर पर उभरने के लिए तैयार है। इससे देश की अरबों की विदेशी मुद्रा बचेगी और भारत के आर्थिक परिदृश्य की नई तस्वीर बनेगी।
2 बड़ी कंपनियां रहीं मुख्य आकर्षण, 2 हजार लोगों के लिए पैदा हो सकता है रोजगार
आज के कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण दो बड़ी कंपनियां रहीं, जिनका नाम ASCENT-K सर्किट (जो कोरिया की KCC के साथ एक जॉइंट वेंचर है) और AMBER एंटरप्राइजेज है। ASCENT-K एडवांस्ड, हाई-डेंसिटी और मल्टी-लेयर PCB बनाने के लिए ₹3,250 करोड़ का निवेश कर रही है। AMBER की ₹3,500 करोड़ की फ़ैसिलिटी मुख्य रूप से ज़रूरी HVAC कंपोनेंट्स और PCB असेंबली पर ध्यान केंद्रित करेगी। इन दोनों प्लांट्स से लगभग 3,000 लोगों के लिए रोज़गार पैदा होने की उम्मीद है।
IT मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा, “जेवर इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग के लिए भारत के प्रमुख केंद्रों में से एक बनने की राह पर है। हम सिर्फ़ असेंबली से आगे बढ़कर डीप मैन्युफैक्चरिंग की ओर बढ़ रहे हैं। यहां बनने वाले एडवांस्ड मल्टी-लेयर PCB – जिनमें से कुछ में 20 से 22 लेयर्स होती हैं – आधुनिक टेक्नोलॉजी की रीढ़ हैं। जिन चीज़ों को हम पहले आयात करते थे, उन्हें अब हम दुनिया के लिए ‘मेक इन इंडिया’ के तहत बनाएंगे।”
हर साल कितना PCB आयात करता था भारत?
भारत हर साल 40,000 करोड़ रुपए के PCB आयात करता था। इस प्रोडक्शन को जेवर और दूसरे हब में शिफ्ट करने से भारत की आयात पर निर्भरता कम होगी और हमारे ‘बैलेंस ऑफ़ पेमेंट्स’ (BoP) में सुधार होगा। अगर ये यहीं बनेगा तो हर PCB से विदेशी मुद्रा की बचत होगी, जिससे रुपया मज़बूत होगा और हमारे विदेशी मुद्रा भंडार को बढ़ावा मिलेगा।
दरअसल देश में इस समय विकास की रफ्तार जबरदस्त है। भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्शन 2014-15 में ₹1.9 लाख करोड़ से बढ़कर 2025-26 में लगभग ₹13 लाख करोड़ हो गया है, जो छह गुना बढ़ोतरी है। इसी दौरान, इलेक्ट्रॉनिक्स एक्सपोर्ट भी 11 गुना बढ़कर 2025-26 में ₹13 लाख करोड़ तक पहुंच गया है। भारत पहले से ही इलेक्ट्रॉनिक्स एक्सपोर्ट करने वाला छठा सबसे बड़ा देश है और सरकार ने दुनिया में दूसरे नंबर पर आने का लक्ष्य रखा है।
जेवर में बना इंफ्रास्ट्रक्चर एक मुख्य वजह है क्योंकि यहां हालही में एयरपोर्ट शुरू हुआ है। ऐसे में इस इलाके को ग्लोबल इन्वेस्टर्स के लिए एक बहुत आकर्षक जगह बनाया जा रहा है। जेवर में आज का समारोह इस बात का सबूत है कि भारत न केवल ग्लोबल टेक रेस में शामिल होने के लिए, बल्कि उसमें सबसे आगे रहने के लिए भी दृढ़ संकल्पित है।
