कॉपियां बिकीं नहीं तो ‘मैडम’ ने बेच खाई तहजीब, अब पुलिस सिखाएगी नैतिकता का नया पाठ!

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​हरदोई। जहाँ बच्चों को अदब और तहजीब सिखाई जानी चाहिए, वहां एक माँ को जिल्लत झेलनी पड़ी। हरदोई के एक स्कूल में कॉपियों की खरीद को लेकर शुरू हुआ विवाद अब थाने की दहलीज तक पहुँच गया है। कॉपियों के चंद रुपयों के लिए एक महिला अभिभावक के साथ न सिर्फ बदतमीजी की गई, बल्कि उन पर कथित तौर पर जातिसूचक टिप्पणियां भी फेंकी गईं। लेकिन स्कूल प्रबंधन शायद यह भूल गया कि आज का दौर ‘कैमरे’ का है; एक वीडियो वायरल हुआ और मैडम के रसूख की सारी हवा निकल गई।
बीती 24 अप्रैल को नीलम वर्मा अपनी बेटी अलीशा के स्कूल यह गुहार लेकर पहुंची थीं कि कॉपियों के पैसे देने के लिए उन्हें कुछ दिनों की मोहलत दी जाए। उम्मीद थी कि स्कूल उनकी मजबूरी समझेगा, लेकिन हुआ इसके उलट। आरोप है कि स्कूल प्रबंधन ने संवेदनहीनता की सारी हदें पार कर दीं। नीलम के साथ अभद्र व्यवहार किया गया और उन्हें अपमानित करके स्कूल से निकाला गया।
26 अप्रैल को जैसे ही इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, पूरे जिले का पारा चढ़ गया। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के कार्यकर्ताओं ने स्कूल के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए जमकर प्रदर्शन किया। दबाव बढ़ता देख जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) डॉ. अजीत सिंह ने तत्काल एक्शन लिया और तीन सदस्यीय जांच टीम गठित कर खुद स्कूल की पैमाइश करने पहुँच गए।
जांच में प्रथम दृष्टया स्कूल प्रबंधन की भूमिका संदिग्ध पाई गई। BSA ने बिना देर किए खंड शिक्षा अधिकारी को स्कूल की प्रधानाचार्य और प्रबंधक के खिलाफ FIR दर्ज कराने के आदेश दिए। कड़ा संदेश देते हुए उन्होंने स्कूल प्रबंधक ममता मिश्रा के विद्यालय परिसर में प्रवेश पर भी तब तक रोक लगा दी है जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती।
पुलिस ने नीलम वर्मा की तहरीर पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 352 और SC/ST एक्ट की गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है। अब पुलिस की जांच की आंच स्कूल की उन ऊंची कुर्सियों तक पहुँचने वाली है, जिन्हें लगा था कि वो नियमों और मर्यादा से ऊपर हैं।
यह घटना बताती है कि कैसे आज कुछ शिक्षण संस्थान ‘विद्या दान’ की जगह ‘व्यापार’ को प्राथमिकता दे रहे हैं। उम्मीद है कि इस कार्रवाई के बाद उन स्कूलों को कड़ा सबक मिलेगा जो अभिभावकों की मजबूरी का फायदा उठाकर उन्हें नीचा दिखाने की कोशिश करते हैं।