पीलीभीत की मतदाता सूची में गड़बड़ी को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी की शिकायतों के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने मामले की जांच के निर्देश दिए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि जांच में अनियमितताएं सामने आने पर जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उधर, कांग्रेस ने पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र में 16,554 मतदाताओं से जुड़ी गड़बड़ियों का दावा करते हुए मामले को अदालत तक ले जाने की बात कही है।
EPIC नंबर वही, मतदाताओं के नाम बदलने का आरोप
कांग्रेस और सपा की ओर से आरोप लगाया गया है कि पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में EPIC नंबर सही होने के बावजूद कुछ मतदाताओं के नाम बदल दिए गए हैं। इसके अलावा पात्र मतदाताओं के नाम काटने और ऐसे लोगों के नाम जोड़ने की शिकायत भी की गई है, जो संबंधित क्षेत्र में रहते ही नहीं हैं।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने पीलीभीत के जिला निर्वाचन अधिकारी को मामले की शीघ्र जांच कर रिपोर्ट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। आयोग की ओर से मतदाता सूची में EPIC नंबर से संबंधित त्रुटियों को तत्काल दुरुस्त करने और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच करने को भी कहा गया है।
कांग्रेस का दावा- 13,150 मतदाताओं के नाम बदले
प्रदेश कांग्रेस ने बुधवार को पार्टी मुख्यालय में संयुक्त प्रेसवार्ता कर विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SIR) के तहत मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी का आरोप लगाया। पार्टी नेताओं के मुताबिक, 10 अप्रैल को जारी अंतिम ड्राफ्ट सूची के बाद जुलाई से सितंबर के बीच पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र में 13,150 मतदाताओं के नाम बदल दिए गए, जबकि उनके EPIC नंबर और सीरियल नंबर पहले जैसे ही रहे।
कांग्रेस ने दावा किया कि क्षेत्र में 884 ऐसे मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए, जो अब भी वहां मौजूद हैं। वहीं, 2,600 ऐसे मतदाताओं के नाम जोड़ने का आरोप लगाया गया, जो कथित तौर पर उस क्षेत्र में रहते ही नहीं हैं। पार्टी के अनुसार, इन तीन श्रेणियों को मिलाकर कुल 16,554 मतदाताओं से जुड़ी अनियमितताओं का मामला सामने आया है। हालांकि, ये आंकड़े फिलहाल कांग्रेस की ओर से लगाए गए आरोप हैं, जिनकी पुष्टि जांच के बाद ही होगी।
सपा ने भी दिया था ज्ञापन
मतदाता सूची में गड़बड़ी का मामला केवल कांग्रेस ने ही नहीं उठाया है। समाजवादी पार्टी ने भी इस संबंध में शिकायत करते हुए सोमवार को ज्ञापन दिया था। इसके बाद बुधवार को कांग्रेस ने प्रेसवार्ता कर आरोपों को प्रमुखता से उठाया और मामले में कानूनी कार्रवाई की बात कही। विपक्षी दलों ने मतदाता सूची की निष्पक्ष जांच और पात्र मतदाताओं के अधिकार सुरक्षित रखने की मांग की है।
कांग्रेसी बोली- अदालत का रुख करेंगे
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय के स्थान पर प्रदेश अध्यक्ष के रूप में उल्लेखित आराधना मिश्रा मोना ने कहा कि मतदाता सूची से नाम गायब होना गंभीर मामला है। उन्होंने बताया कि पार्टी इस मुद्दे पर कानूनी राय लेगी और मामले को आगे बढ़ाएगी। प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष और सांसद इमरान मसूद ने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा करना किसी एक राजनीतिक दल की नहीं, बल्कि हर नागरिक की जिम्मेदारी है। उन्होंने भी मामले को लेकर अदालत जाने की बात कही।
पार्टी के प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने मतदाता सूची में कथित बदलावों पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव प्रक्रिया में ऐसी गड़बड़ियां आम लोगों की नजरों से छिपी रह सकती हैं। कांग्रेस नेताओं ने निर्वाचन आयोग से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
सुप्रीम कोर्ट से संज्ञान लेने की मांग
कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने भी मामले को गंभीर बताते हुए सुप्रीम कोर्ट से स्वत: संज्ञान लेने की मांग की। उन्होंने कहा कि पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र से प्रदेश सरकार में मंत्री संजय गंगवार वर्ष 2022 का विधानसभा चुनाव 6,930 मतों के अंतर से जीते थे। इसी क्षेत्र में मतदाता सूची से जुड़ी कथित अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं।
श्रीनेत ने चुनाव प्रक्रिया और संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए। कांग्रेस नेताओं ने इस पूरे मामले को अदालत में उठाने की बात कही है। हालांकि, मतदाता सूची में गड़बड़ी और किसी अधिकारी की संलिप्तता से जुड़े आरोपों पर अंतिम स्थिति जांच और संबंधित प्राधिकारियों की कार्रवाई के बाद ही स्पष्ट होगी।
दो दिन में मांगी गई रिपोर्ट, पूरे प्रदेश में जांच
निर्वाचन आयोग ने पीलीभीत के सभी विधानसभा क्षेत्रों की मतदाता सूचियों में EPIC नंबर से संबंधित गड़बड़ियों की गहन जांच कर दो दिन के भीतर विस्तृत रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं। उत्तर प्रदेश के सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को भी अपने-अपने जिलों के विधानसभा क्षेत्रों की मतदाता सूचियों की इसी बिंदु पर जांच करने और रिपोर्ट उपलब्ध कराने को कहा गया है।
पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र के निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी और वीआरसी ऑपरेटर को मतदाता सूची से जुड़े काम से तत्काल हटाने के निर्देश भी दिए गए हैं। साथ ही लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 32 और भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत विधिक कार्रवाई करने को कहा गया है। सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों की जिम्मेदारी को लेकर भी स्पष्ट रिपोर्ट मांगी गई है।
SIR से जुड़े अधिकारियों के तबादलों पर रोक
मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा के अनुसार, भारत निर्वाचन आयोग ने एक जनवरी 2027 की अर्हता तिथि के आधार पर होने वाले विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण कार्यक्रम से जुड़े अधिकारियों के स्थानांतरण पर रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। आलेख्य प्रकाशन से अंतिम प्रकाशन तक आयोग की पूर्व अनुमति के बिना संबंधित अधिकारियों का तबादला नहीं किया जा सकेगा। पुनरीक्षण कार्य में लगे अधिकारियों के पद रिक्त नहीं रखने के निर्देश भी दिए गए हैं।
मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन चार जनवरी 2027 को किया जाएगा। ऐसे में आयोग की ओर से प्रदेशभर में जांच और पुनरीक्षण प्रक्रिया की निगरानी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
