लॉकडाउन के दौरान मरीजों के अधिकारों के लिए पहली ई-कॉनक्लेव सम्पन्न

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  • लॉकडाउन के दौरान मरीजों के अधिकारों के लिए पहली ई-कॉनक्लेव गैर-कोविड अत्यावश्यक स्वास्थ्य सेवाएं मुद्दे पर सम्पन्न
  • कोविड-19से जुड़े कलंक और घबराहट को दूर करना, सामान्य स्थिति लाना, अत्यावश्यक सेवाओं की कमी के कारण रोगियों की पीड़ा पर विस्तार से चर्चा की गई

(www.atya-tv.com)नई दिल्ली। कोविड-19 की घबराहट और अफरा-तफरी के बीच मरीजों के अधिकारों के बारे में अपनी तरह का पहला ई-कॉनक्लेव आयोजित किया गया। इसमें ‘मरीजों के अधिकारों’ के लगभग सभी मुद्दों को संबोधित किया गया।विस्तृत विषय था “क्यागैर-कोविड अत्यावश्यक स्वास्थ्य सेवाएं कोविड की घबराहट के कारण हताहत हो रही हैं।” जिसमें कईं संबंधित विषय सम्मिलित थे। ई-कॉनक्लेव का आयोजन स्वास्थ्य सेवा के समर्थक समुह– हील फाउंडेशन द्वारा विश्व के सबसे बड़े सामाजिक सेवा संगठन सेवा भारती के सहयोग से, 16 मई 2020 को शाम 4.00 बजे से 8.00 बजे तक किया गया था।

ई-कॉनक्लेव का उद्देश्य उन अंतर्निहित समस्याओं पर चर्चा करना था जो गैर-कोविड रोगियों को कोविड-19 के कारण उपजे हालातों के कारण हो रही हैं। यह देखा जा रहा है कि कोविड के हो-हल्ले के दौरान, गैर-कोविड रोगी सबसे अधिक पीड़ित हो रहे हैं। इनमें से अधिकतर रोगी घातक बीमारियों जैसे कैंसर, किडनी रोगों (जिन्हें डायलिसिस की जरूरत है) और डायबिटीज के हैं। ये रोगी कईं परेशानियों का सामना कर रहे हैं, क्योंकि नियमित स्वास्थ्य सेवाएं सुचारू रूप से न चलने के कारण रोगियों को आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएंउपलब्ध नहीं हो पा रही हैं।

ई-कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए हील फाउंडेशन के संस्थापक, डॉ. स्वदीप श्रीवास्तव ने कहा, जब से कोविड-19 का प्रकोप हुआ है, हर कोई केवलइस संक्रमण के बारे में बात कर रहा है। लेकिन उन समस्याओं पर कोई चर्चा नहीं कि जा रही है जिनका सामना घातक बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को कोविड-19 के कारण दिन-प्रतिदिन करना पड़ रहा है।कोविड-19 से जो एक कलंक जुड़ गया है, जिस तरह से इस संक्रमण से जूझ रहे लोगों का सामाजिक बहिष्कार किया जा रहा है तथा कोविड-19 के पश्चात के परिदृश्य पर गहन विचार-विमर्श करने की आवश्यकता है, जहां स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े पेशेवर लोगों, इसके साथ ही संस्थानों को कोविड और गैर-कोविड रोगियों को संकट से बचाने के लिए व्यापक रोगी देखभाल को संबोधित करने की आवश्यकता होगी।

डॉ. श्रीवास्तव ने आगे कहा, केवल 60 दिनों में, इंटरनेट के माध्यम से 6 से अधिक गोष्ठियां और सम्मेलन आयोजित किए गए हैं, जिसमें हमने लगभग 20 घंटे से अधिकसमय तक ‘स्वास्थ्य शिक्षा’ पर चर्चा/विचार-विमर्श और विवेचना की। इसमें लगभग 75 विशेषज्ञों, चिकित्सा कोल्स, महिला नेताओं, मीडिया और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े विशेषज्ञों ने भाग लिया। इसके अंतर्गत पहली लाइव ई-हेल्थ समिट औरमरीजों के अधिकारों के लिए पहली ई-कान्क्लेव को सीधे तीन लाख से अधिक लोगों तक पहुंचाया गया। हम लोगों को उनके घर पर ही सही स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता फैलाने के लिए प्रतिबद्ध हैं और यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि हमारे साथी देशवासियों को जानकारी की कमी के कारण या सोशल मीडिया पर प्रसारित किसी भी गलत जानकारी के कारण नुकसान न हो।

सत्र में पांच सौ से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनके पास पैनेलिस्टों से पूछने के लिए ढेरों प्रश्न थे। इसमें 10 से अधिक पैनेलिस्ट ने भाग लिया, जिनमें चिकित्सा जगत से जुड़े लोग, पत्रकार, समाजिक कार्यकर्ता, उद्यमी, स्वास्थ्य सम्प्रेषक और विधि विशेषज्ञ सम्मिलित थे। इन्होंने उत्साह और जोश के साथ भाग लिया और अपने-अपने दृष्टिकोणकी विवेचना की। उन्होंने कईं चीजों पर अपनी रचनात्मक आलोचना भी सामने रखी और वर्तमान में जारी और आगामी परिस्थितियों से निपटने के लिए संभावित समाधान सुझाए।

समाज के अलग-अलग वर्गों के बीच एकता के महत्व पर बल देते हुए सेवा भारती के महासचिव डॉ. राम कुमार ने कहा, कोविड-19 महामारी ने हमें एक साथ आकर इसविपत्ती से एकजुटता के साथ लड़ने का अवसर दिया है। हम, एक समाज के रूप में ऐसी किसी भी समस्या का समाधान प्राप्त कर सकते हैं। आपसी सहयोग की भावना ही पीड़ितों को बचा सकती है और संकट से बाहर आने का मार्ग प्रशस्त कर सकती है। सेवा भारती वंचितों को जीवित रखने के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार काम कर रहा है। कोविड-19 महामारी के प्रकोप और लॉकडाउन के बाद से, हम उन लाखों लोगों को भोजन प्रदान करने में कामयाब रहे हैं, जो भुखमरी के कगार पर थे।

अन्य वक्ताओं ने उन्हें सौंपे गए संबंधित विषयों पर अपने विचार रखे। पीएसआरआई हॉस्पिटल के सीईओ, डॉ. दीपक शुक्ला ने लॉकडाउन के पश्चात, स्वास्थ्य सेवा से जुड़े पेशेवर लोगों और संस्थाओं को कोविड-19 से परे व्यापक और समग्र रोगी देखभाल को संबोधित करने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। दिल्ली मेडिकल असोसिएशन के अध्यक्ष-निर्वाचित, डॉ. जी.एस. ग्रेवाल ने, निजी क्षेत्र मेंस्वचलित क्लीनिकों के लिए भारत सरकार द्वारा कोई दिशा-निर्देशों जारी न करने पर चर्चा की, उन्होंने कहा कि ये स्थिति अनिश्चितता की ओर ले जाने वाली है।‘राष्ट्रीय चिकित्सा संगठन के राष्ट्रीय सचिव डॉ. योगेंद्र मलिक ने, कोविड-19 से संबंधित सामाजिक कलंक के प्रति हम सबकी जवाबदेही सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया।

एम्स के सामुदायिक चिकित्सा विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष, डॉ. चंद्रकांत एस.पांडव ने महामारी क्या होती है और इनको विश्वभर में कैसे नियंत्रित किया जाता है कि विवेचना की। उन्होंने कहा, यह बीसवीं महामारी है पहली नहीं। पहली महामारी जो 165 ईस्वी में आई थी, उसने पचास लाख लोगों का जीवन लील लिया था। तो चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है, एहतियाद बरतें, सामाजिक संवेदनशीलता के साथ सामाजिक दूरी के साथ ही शारीरिक दूरी बनाए रखने जैसे निवारक उपायों का पालन करें और हर पल का आनंद लें। आधुनिक समय में कोविड-19 ने संदेश दिया है कि पूरी दुनिया एक परिवार है। जीवन के आयुर्वेदिक तरीके का पालन करें और अपनी प्रतिरक्षा को मजबूत बनाएं।

वक्ताओं में जैसे टीवी-9 के परामर्श संपादक श्रीधरन रामकृष्णन ने, ‘मीडिया की रचनात्मक जिम्मेदारियों पर विचार-विमर्श किया। मेडिको-लीगल एक्सर्ट सुधीर मिश्रा ने रोगियों के अधिकार और स्वास्थ्य सेवाओं तक उनकी पहुंच से जो समझौता हो रहा है उसे कैसे ठीक किया जाए पर अपने विचार रखे। मातृभूमि के मुख्य संपादक, मनोज दास ने,‘कोविड-19 की महामारी के दौरान भाषाई मीडिया (केरल से उदाहरण) की भूमिका पर विश्लेषणात्मक रूप से प्रकाश डाला।‘ हील फाउंडेशन के अध्यक्ष, आर. शंकर ने पूरे सत्र का अवलोकन किया और ‘गैर-कोविड मरीजों के लिए आवश्यक सेवाओं को एक उचित योजनाबद्ध तरीके से बहाल करने की आवश्यकता पर बल दिया।

डॉक्टर और मरीज दोनों ही कोविड-19 से पीड़ित है, क्या समाधान हैं? और आगे क्या मार्ग हैं, विषय को जांचते हुए महाराजा अग्रसेन अस्पताल के मेडिकल डायरेक्टर डॉ. दीपक सिंगला ने कहा, हमें कोविड-19 की घबराहट से बाहर आने और सामान्य स्थिति की ओर बढ़ने की आवश्यकता है, क्योंकि लॉकडाउन ने नियमित रोगियों जैसे कि किडनी रोगी जो डायलिसिस पर हैं और डायबिटीज़ के रोगियों को परेशानी में डाल दिया है। बच्चों के नियमित टीकाकरण का शेड्यूल गड़बड़ा गया है। समाज और सरकार को आवश्यक निवारक उपायों को बरकरार रखते हुए सामान्य स्थिति पुनः स्थापित करने के लिए काम करना चाहिए।

हील फाउंडेशन के बारे में:हील फाउंडेशन एक गैर-लाभकारी संगठन है, जो अपनी प्रमुख पहल कोविड-फाइटर्स के तहत लगन से काम कर रहा है – कोविड-19 महामारी से लड़ने के लिए समर्पित है; कोरोना के प्रकोप के बाद से, इसके विभिन्न जागरूकता अभियान जैसे कि इंटरनेट के माध्यम से गोष्ठियों व सम्मेलन और अन्य संबद्ध गतिविधियों का आयोजन करना

आप हील फाउंडेशन के बारे में अधिक जानकारी www.healfoundation.in पर और कोविड-19 के लिए समर्पित इसके कार्यक्रमों पर www.covidfighters.inसे प्राप्त कर सकते हैं।

सेवा भारती के बार में:दिल्ली स्थित सेवा भारती, राष्ट्रीय सेवा भारती का एक भाग है। यह विश्व का सबसे बड़ा सामाजिक सेवा संगठन है, जो आदिवासियों और स्वदेशी समुदायों, शहरी झुग्गी बस्तियों और पुनर्वास कालोनियों सहित भारतीय समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के बीच काम करता है। आप इस वेबसाइटwww.sewabhartidelhi.orgद्वारा सेवाभारती, दिल्ली के बारे में और अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

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