अयोध्या: राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान और आभूषणों में कथित चोरी के मामले में कई बड़े अपडेट सामने आए हैं। जांच के दौरान सामने आए तथ्यों ने मंदिर की दान व्यवस्था, चढ़ावे की गिनती और सुरक्षा प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या दौरे के दौरान भरोसा दिलाया है कि दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा और अगले 15 दिनों में पूरे मामले का सच सामने आ जाएगा।
‘आस्था से खिलवाड़ करने वालों को सरकार नहीं छोड़ेगी’
राम मंदिर में चढ़ावे में कथित चोरी के खुलासे के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहली बार अयोध्या पहुंचे। रामलला के दर्शन के बाद उन्होंने कहा कि करोड़ों रामभक्तों की आस्था से खिलवाड़ करने वालों को सरकार नहीं छोड़ेगी। उन्होंने कहा कि विशेष जांच दल (SIT) मामले की जांच कर रहा है और चाहे कोई कितना भी प्रभावशाली व्यक्ति क्यों न हो, यदि वह दोषी पाया गया तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। मुख्यमंत्री ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और जांच पूरी होने तक धैर्य रखने की अपील की। साथ ही उन्होंने विपक्षी दलों पर भी निशाना साधते हुए कहा कि अयोध्या और राम मंदिर को बदनाम करने की कोशिशें सफल नहीं होंगी।
चंपत राय से दूरी के भी निकाले जा रहे राजनीतिक मायने
मुख्यमंत्री के इस दौरे में एक और बात चर्चा का विषय रही। राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय इस बार उनके साथ नजर नहीं आए। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री के दौरे से पहले जिला प्रशासन ने ट्रस्ट को संदेश भेजा था कि इस बार चंपत राय की जगह कोई अन्य प्रतिनिधि मौजूद रहे। हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है।
SIT के सामने बड़ी चुनौती, पुरानी फुटेज हो चुकी है डिलीट
मामले की जांच कर रही SIT को सात दिन में प्राथमिक रिपोर्ट और 15 दिन में अंतिम रिपोर्ट सौंपनी है। लेकिन जांच एजेंसी के सामने सबसे बड़ी चुनौती CCTV फुटेज है। मंदिर परिसर और काउंटिंग सेंटर में लगे कैमरों की रिकॉर्डिंग केवल 45 दिन तक सुरक्षित रहती है और उसके बाद स्वतः डिलीट हो जाती है। जांचकर्ताओं को जो फुटेज मिली है, उसमें कुछ कर्मचारी कथित तौर पर चढ़ावे की रकम छिपाते हुए दिखाई दिए हैं। इनकी पहचान कर ली गई है और उनसे पूछताछ जारी है। हालांकि उनके नाम अभी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
किन लोगों पर है जांच एजेंसियों की नजर?
जांच का फोकस मंदिर प्रबंधन और चढ़ावे की गिनती से जुड़े कई लोगों पर है। इनमें ट्रस्ट सदस्य अनिल मिश्रा, निर्माण सहायक गोपाल राव, टिन्नू यादव, केडी तिवारी, सुभाष श्रीवास्तव, राजेश पाठक, मनीष यादव, करुण, ऋतिक, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा और सोमेश सहित अन्य लोगों के नाम सामने आए हैं। सबसे ज्यादा सवाल ट्रस्ट सदस्य अनिल मिश्रा की भूमिका को लेकर उठ रहे हैं। चढ़ावे की गिनती, बैंक में जमा कराने और वित्तीय प्रबंधन की जिम्मेदारी उनके पास थी। SIT उनसे कई दौर की पूछताछ कर चुकी है और यह जानने की कोशिश कर रही है कि गिनती में लगे लोगों की नियुक्ति कैसे हुई और नियमों का पालन क्यों नहीं हुआ।
पूर्व इंजीनियर ने लगाए कई गंभीर आरोप
राम मंदिर निर्माण से जुड़े रहे पूर्व इंजीनियर दीनानाथ वर्मा ने दावा किया है कि वित्तीय अनियमितताएं नई नहीं हैं। उनके मुताबिक मंदिर निर्माण के दौरान भी कमीशनखोरी और पैसों की हेराफेरी होती रही। उन्होंने आरोप लगाया कि इस संबंध में शिकायत करने पर भी कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। वर्मा ने कहा कि इस बार में चंपत राय से भी शिकायत की गई थी लेकिन उन्होंने इस मुद्दे से आंखें फेर ली थीं।
