गोरखपुर(www.arya-tv.com) उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के 250 मातृ शिशु परिवार कल्याण केंद्रों (उप स्वास्थ्य केंद्र) की हालत बदतर है। ज्यादातर केंद्रों के दरवाजे गायब हैं। रंगाई-पुताई के अभाव में केंद्र खंडहर से दिखने लगे हैं।
साफ-सफाई की व्यवस्था बेहद खराब है। एक केंद्र में भूसा भरा मिला है। लिहाजा, टीकाकरण का काम भी नहीं हो पाता है। एएनएम व आंगनबाड़ी कार्यकर्ता किसी झोपड़ी में बैठकर टीकाकरण करती हैं। अमर उजाला की पड़ताल से पता चला कि मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को नियंत्रित करने, टीकाकरण और गर्भवतियों की जांच के लिए खोले गए केंद्र सिर्फ कागजों में अच्छे से चल रहे हैं। वास्तविकता कुछ और है।
चिल्लूपार क्षेत्र के खुटभार गांव में बना सेंटर बदहाल है। कमरों में भूसा भरा है। दरवाजा टूट चुके हैं। गांव के भारतेंदु सिंह, प्रशांत सिंह, गोपाल सिंह, अयोध्या सिंह, अरविंद पासवान, जमदीन के मुताबिक सेंटर में आज तक प्रसव नहीं कराया गया है।
ज्यादातर महिलाएं प्रसव के लिए निजी अस्पतालों में जाती हैं। कुछ ऐसी ही स्थिति क्षेत्र के मझवलिया गांव में बने मातृ-शिशु केंद्र की है। केंद्र जर्जर हालत में है। जानकारी के मुताबिक डेरवा पीएचसी के अंतर्गत 30 केंद्र बने हैं। इनकी स्थिति खराब है। इन सभी केंद्रों पर एएनएम की तैनाती भी है, लेकिन पिछले कई सालों से केंद्रों पर प्रसव ही नहीं कराए ही गए हैं।
