स्टैंडर्ड चार्टर्ड की नई वेल्थ एक्सपेक्टेंसी रिपोर्ट 2019

Business

(www.arya-tv.com) संपन्न वर्ग, उभरते संपन्न वर्ग और हाई-नेटवर्थ इंडीविजुअल (एचएनडब्ल्यूआई) पर केंद्रित स्टैंडर्ड चार्टर्ड की नई वेल्थ एक्सपेक्टेंसी रिपोर्ट 2019 का कहना है कि भारत में इन बचतकर्ताओं में से हर पांच में से तीन (60 फीसदी) की भविष्य के लिए निवेश उत्पादों सहित अपनी वित्तीय रणनीति है।

स्टडी से यह भी पता चलता है कि भारत में किसी भी अन्य बाजार की तुलना में इन बचतकर्ताओं में से हर पांच में से चार (77 प्रतिशत) का मानना है कि अगर आपको खुश रहना है तो धन की इसमें महत्वपूर्ण भूमिका होगी।भारतीय संपन्न वर्ग केे बचतकर्ता अपने समकक्षों की तुलना में डिजिटल बैंकिंग के बारे में कहीं अधिक सकारात्मक हैं भारत में उभरते संपन्न वर्ग (78 प्रतिशत) और संपन्न वर्ग (79 प्रतिशत) में से लगभग हर पांच में से चार वित्तीय रूप से अपने धन का प्रबंधन करने के लिए डिजिटल रूप से सहज है और दोनों समूहों के 81 फीसदी लोगों का मानना है कि इससे उन्हें अपने जीवन की बेहतर गुणवत्ता हासिल करने में मदद मिली है।

वेल्थ एक्सपेक्टेंसी रिपोर्ट 2019 तेजी से उभरती अर्थव्यवस्थाओं में 10,000 उभरते संपन्न, संपन्न और हाई-नेटवर्थ इंडीविजुअल (एचएनडब्ल्यूआई) की बचत और निवेश की आदतों को परखते हुए लोगों की आकांक्षाएं उनकी ’धन प्रत्याशा’ या वेल्थ एक्सपेक्टेंसी का जायजा लेती है और अंदाजा देती है कि 60 वर्ष की आयु में उनकी संभावित टोटल नेटवर्थ वैसी ही रह पाएगी या नहीं।भारत के लिए निष्कर्ष बताते हैं कि बचत और निवेश करने के लिए पर्याप्त डिस्पोजेबल आय वाले लोगों के पास सेवानिवृत्ति के लिए अपनी आकांक्षाओं को साकार करने का एक बड़ा अवसर है।

पहले से ही, लगभग एक तिहाई (32 प्रतिशत) 60 वर्ष की आयु में धन के अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए आधे से अधिक धन के साथ ट्रैक पर हैं। 68 फीसदी, जो अपने लक्ष्य से बहुत दूर है, अभी भी अच्छी तरह से परिभाषित लक्ष्यों के साथ धन प्रबंधन करते हुए इस अंतर को कम कर सकते हैं। स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक, इंडिया में प्रायरिटी, डिपाॅजिट्स और ब्रांच बैंकिंग के मैनेजिंग डायरेक्टर, हैड श्री नकुल जैन ने कहाः ‘जो लोग सेवानिवृत्ति पर धन से संबंधित निराशा से बचना चाहते हैं उनके लिए कार्रवाई करने का समय अभी से शुरू हो जाता है।

बड़े अंतरराष्ट्रीय बैंकों, जैसे कि स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक की धन प्रत्याशा अंतर या वेल्थ एक्सपेक्टेंसी गेप को कम करने में लोगों की मदद करने में महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसकी शुरुआत यह समझने के साथ होती है कि हमारे ग्राहकों को वास्तव में क्या चाहिए, फिर हम हमारी धन विशेषज्ञता और मताधिकार का उपयोग करके उन्हें शिक्षित करने और उन्हें अपनी आकांक्षाओं के अनुरूप धन का प्रबंधन करने के लिए सशक्त बनाते हैं।’