गर्भवती महिलाओं में खून की कमी का मामला चिंता बढ़ा रहा है। जिले में 529 गर्भवती महिलाओं में गंभीर एनीमिया की पुष्टि हुई है। इनका हीमोग्लोबिन सात ग्राम प्रति डेसीलीटर से भी कम मिला है। अगस्त में स्वास्थ्य विभाग की ओर से करीब 30 हजार गर्भवती महिलाओं की जांच कराई गई थी। इसमें सामने आए आंकड़े मातृ स्वास्थ्य को लेकर गंभीर स्थिति की ओर इशारा कर रहे हैं।
गर्भावस्था के दौरान शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी होने से मां के साथ गर्भस्थ शिशु की सेहत पर भी असर पड़ सकता है। जिला महिला अस्पताल की डॉ. शैब्या के मुताबिक, एनीमिया के प्रमुख कारणों में आयरन और फोलिक एसिड की गोलियां नियमित रूप से नहीं लेना, पोषक आहार की कमी और गर्भावस्था के दौरान जरूरी जांच नहीं कराना शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि गंभीर एनीमिया की स्थिति में महिलाओं को कमजोरी और सांस फूलने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। प्रसव के दौरान जटिलताओं का खतरा भी बढ़ जाता है। इसके अलावा गर्भस्थ शिशु के विकास पर भी इसका असर पड़ सकता है। ऐसे में गर्भवती महिलाओं की समय पर जांच और चिकित्सकीय देखरेख जरूरी है।
