देवा मेला एवं प्रदर्शनी में दुकान लगाने वाले व्यापारी इन दिनों बिजली शुल्क की कथित मनमानी वसूली से परेशान हैं। दुकानदारों का आरोप है कि विद्युत व्यवस्था का ठेका लेने वाली लखनऊ की फर्म के कर्मचारी एक रॉड या सीएफएल जलाने के लिए 500 से 600 रुपये, जबकि फ्रिज और डीप फ्रीजर चलाने के नाम पर चार से छह हजार रुपये प्रति उपकरण तक वसूल रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि न तो शुल्क की कोई सार्वजनिक दर सूची है और न ही भुगतान की रसीद दी जा रही है।
बिना निर्धारित दर के कैसे हो रही वसूली?
दुकानदारों का कहना है कि वे अपने उपकरण और तार लगाने के बावजूद मोटी रकम देने को मजबूर हैं। विरोध करने पर बिजली कनेक्शन काटने की धमकी दी जाती है। उनका सवाल है कि आखिर किस नियम और आदेश के तहत यह वसूली की जा रही है। वर्ष 1925 में गठित देवा मेला एवं प्रदर्शनी समिति, जिसकी अध्यक्षता जिलाधिकारी करते हैं, ने बिजली व्यवस्था का ठेका तो दिया है, लेकिन उपकरणों के हिसाब से शुल्क निर्धारित नहीं किया है।
अधिक वसूली हुई तो होगी कार्रवाई : सुपरवाइजर
दुकानदारों ने जिलाधिकारी से दरें सार्वजनिक कराने, बिना रसीद वसूली पर रोक लगाने और जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। देवा मेला समिति के सुपरवाइजर इक्तेदार अहमद शक्कू ने बताया कि बिजली शुल्क वसूली की व्यवस्था काफी पुरानी है। विद्युत व्यवस्था संचालन के लिए टेंडर के माध्यम से फर्म को जिम्मेदारी दी गई है। यदि दुकानदारों से निर्धारित शुल्क से अधिक वसूली की गई है तो उच्च अधिकारियों को अवगत कराकर कार्यदायी संस्था के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। मामले की जानकारी कराई जा रही है।
