जमीन के विवाद में मुकदमे में सुलह न करने पर जानलेवा हमला कर गोली मारने के मामले में विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी एक्ट राकेश पांडेय की अदालत ने विवेचना की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। अदालत ने आरोपी सोहेल उर्फ सुहैल की जमानत अर्जी खारिज करते हुए विवेचक की कार्यशैली पर सवाल उठाए और मामले के प्रमुख पहलुओं की जांच के लिए आदेश की प्रति पुलिस अधीक्षक तथा जिलाधिकारी को भेजने का निर्देश दिया।
अदालत ने कहा कि यदि विवेचना में किसी प्रकार का कदाचार या कर्तव्य में लापरवाही पाई जाती है तो सक्षम अधिकारी नियमानुसार कार्रवाई करें। एडीजीसी सुशील उपाध्याय के अनुसार, बंधुआकला थानाक्षेत्र के अतागंज हसनपुर निवासी मिर्जा सफीर बेग का कुड़वार थाना क्षेत्र के अझुई गांव स्थित गाटा संख्या 606 की जमीन को लेकर महमूद, तोहीद, फातिमा और समीरुल निशा आदि से विवाद चल रहा था। इस संबंध में कुड़वार थाने में पहले से मुकदमा दर्ज था।
आरोप है कि मुकदमे में सुलह न करने पर सफीर बेग को जान से मारने की धमकी दी गई थी। बीती दो अगस्त की रात करीब 10 बजे सफीर बेग अपनी कार से घर जा रहे थे। रहपुरवा-महराजगंज मार्ग पर पानी की टंकी के पास अरशद और अझुई कुड़वार निवासी सोहेल ने उनकी कार के सामने मोटरसाइकिल लगाकर रोक लिया। आरोप है कि गाली-गलौज करते हुए दोनों ने जान से मारने की नीयत से फायरिंग की, जिसमें एक गोली सफीर बेग के पेट में लगी। गंभीर रूप से घायल होने के बाद हमलावर मौके से भाग निकले।
विवेचक की कार्यशैली पर अदालत ने उठाए सवाल
जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान अदालत ने केस डायरी का अवलोकन करते हुए कहा कि विवेचक ने शुरुआती स्तर पर ही गोली लगने की घटना को संदिग्ध और चोट को स्वयं पहुंचाई गई मानने की दिशा में कदम बढ़ा दिए। अदालत के मुताबिक, घटनास्थल का पुनर्निर्माण भी इस तरह किया गया, जिससे घायल के कथन को गलत साबित करने का प्रयास किए जाने की आशंका सामने आई।
घायल के पहले और बाद के बयानों में महत्वपूर्ण विरोधाभास होने के बावजूद उनकी निष्पक्ष जांच के लिए पर्याप्त कदम उठाए जाने पर भी अदालत ने सवाल उठाया। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि घायल के बयान में मौजूद महत्वपूर्ण विसंगतियों की सच्चाई स्पष्ट करने के लिए मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान दर्ज कराने के विकल्प पर विचार किया जाना चाहिए था, लेकिन विवेचक ने ऐसा नही किया।
एसपी और डीएम को भेजी जाएगी आदेश की प्रति
अदालत ने निर्देश दिया कि आदेश की प्रति पुलिस अधीक्षक और जिलाधिकारी को भेजी जाए, ताकि स्वयं गोली मारने की आशंका पर समय से पहले निष्कर्ष निकालने, घटनास्थल के पुनर्निर्माण, घायल के बयानों में विरोधाभास तथा मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान दर्ज कराने पर विचार न किए जाने जैसे बिंदुओं की जांच की जा सके। किसी भी प्रकार का कदाचार या कर्तव्य में लापरवाही पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई करने को कहा गया है।
