‘मिठाई-नमकीन कारोबार पर सख्ती, खाद्य सुरक्षा मानकों की होगी जांच’, खुले काउंटर पर मिठाइयों की ‘यूज बाय डेट’ बताना होगा अनिवार्य

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त्योहारों और सामान्य दिनों में मिठाई व नमकीन की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए उत्तर प्रदेश खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) ने खाद्य कारोबारियों के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश तैयार किए हैं। इनके तहत निर्माण से लेकर पैकेजिंग, भंडारण और बिक्री तक खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा। खाद्य सुरक्षा अधिकारी मिठाई-नमकीन बनाने वाली इकाइयों और दुकानों में साफ-सफाई, कच्चे माल की गुणवत्ता, खाद्य रंगों के इस्तेमाल, तेल की स्थिति, तापमान नियंत्रण और लाइसेंस संबंधी रिकॉर्ड की जांच करेंगे।

एफएसडीए आयुक्त डॉ. रोशन जैकब के अनुसार, इन दिशा-निर्देशों का उद्देश्य उपभोक्ताओं को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराना तथा मिलावट, प्रतिबंधित रसायनों और भ्रामक लेबलिंग पर रोक लगाना है। खुले काउंटर पर रखी मिठाइयों के सामने उनकी उपयोग की अंतिम तिथि यानी ‘यूज बाय डेट’ प्रदर्शित करना भी अनिवार्य होगा।

मावा, दूध और मेवों की गुणवत्ता पर नजर

निरीक्षण के दौरान बेसन, मैदा, सूजी, चीनी, मावा, छेना, दूध, खाद्य तेल, वनस्पति, मेवे और मसालों की गुणवत्ता जांची जाएगी। कच्चे माल में फफूंद, कीट, दुर्गंध या मिलावट नहीं होनी चाहिए। मावा, छेना, दूध और पनीर जैसे जल्दी खराब होने वाले पदार्थों को निर्धारित तापमान पर रखना होगा। बर्फी, पेड़ा, कलाकंद, गुलाब जामुन, रसगुल्ला और रसमलाई जैसी मिठाइयों के भंडारण और प्रदर्शन में भी तापमान नियंत्रण जरूरी होगा। काजू कतली और ड्राई फ्रूट मिठाइयों में पुराने, खराब या फफूंद लगे मेवों का इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। मिठाइयों पर इस्तेमाल होने वाला वर्क शुद्ध चांदी का होना चाहिए। रोडामाइन-बी और मेटानिल येलो जैसे गैर-खाद्य रंगों का इस्तेमाल प्रतिबंधित है। अनुमन्य खाद्य रंग भी निर्धारित सीमा में ही इस्तेमाल किए जा सकेंगे।

पुराने तेल और दोबारा पैकिंग पर कार्रवाई

सेव, भुजिया, चिप्स और मिक्सचर बनाने में घटिया तेल, खराब मसालों और प्रतिबंधित रंगों के इस्तेमाल पर नजर रखी जाएगी। तलने वाले तेल में कुल ध्रुवीय यौगिक (टीपीसी) की मात्रा 25 प्रतिशत से अधिक होने पर उसका खाद्य उपयोग नहीं किया जा सकेगा। इस्तेमाल किए गए तेल का रिकॉर्ड रखना और उसका निस्तारण एफएसएसएआई की आरयूसीओ व्यवस्था के तहत अधिकृत संग्रहकर्ताओं से कराना होगा। एक्सपायर्ड या वापस मंगाए गए नमकीन को नई पैकेजिंग में भरकर दोबारा बेचने पर भी कार्रवाई होगी। पैकेट पर उत्पाद का नाम, सामग्री, एलर्जी संबंधी जानकारी, बैच नंबर, लागू तिथियां और एफएसएसएआई लाइसेंस नंबर स्पष्ट रूप से दर्ज होना चाहिए।

लाइसेंस और खरीद बिल भी जांचेंगे

निरीक्षण में प्रतिष्ठान के लाइसेंस या पंजीकरण की वैधता और उसमें दर्ज गतिविधियों का वास्तविक कारोबार से मिलान किया जाएगा। कारोबारियों को कच्चे माल के खरीद बिल, आपूर्तिकर्ताओं की सूची और बैच संबंधी विवरण सुरक्षित रखने होंगे। लागू प्रावधानों के अनुसार गारंटी प्रमाणपत्र (फॉर्म-ई) भी रखना होगा। अधिकारियों को साफ-सफाई, कीट नियंत्रण, खाद्य अपशिष्ट के निस्तारण और उपभोक्ता शिकायतों के रिकॉर्ड की जांच के निर्देश दिए गए हैं।