उत्तर प्रदेश विधान परिषद (एमएलसी) की स्नातक एवं शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की सीटों के लिए शुक्रवार को हुआ मतदान अचानक विवादों और हंगामे के घेरे में आ गया। आगरा शिक्षक खंड से समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रत्याशी डॉ. आकाश अग्रवाल ने चुनाव प्रक्रिया पर धांधली के गंभीर आरोप लगाए हैं। मीडिया से बात करते हुए सपा प्रत्याशी का गुस्सा और दर्द इस कदर छलका कि वह कैमरों के सामने ही फफक-फफक कर रो पड़े।
‘मेरे साथ ऐसा सलूक हो रहा जैसे पाकिस्तान से आया आतंकवादी हूं’
मीडिया से बात करते हुए डॉ. आकाश अग्रवाल काफी भावुक नजर आए। उन्होंने रोते हुए अपनी भड़ास निकाली और कहा कि उनके समर्थकों और कार्यकर्ताओं को बेवजह परेशान किया जा रहा है। मतदान केंद्रों पर सरेआम गड़बड़ी की जा रही है और ऐसा माहौल बना दिया गया है मानो वह भारत के नागरिक न होकर पाकिस्तान से आए कोई आतंकवादी हों। उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों के रवैये को बेहद अभद्र और दमनकारी करार दिया।
खेरागढ़ और छाता में खुलेआम धांधली का दावा
सपा प्रत्याशी ने प्रशासनिक अधिकारियों और पीठासीन अधिकारियों की कार्यशैली पर सीधा सवाल खड़ा किया। उन्होंने बताया कि खेरागढ़ में जब पीठासीन अधिकारी खाना खाने गए, तो नियमों को ताक पर रखकर सभी पोलिंग एजेंटों और लोगों को जबरन बाहर निकाल दिया गया। वहीं, छाता स्थित मतदान केंद्र को भी पूरी तरह लूटने और वहां फर्जी मतदान कराने का आरोप उन्होंने लगाया। उन्होंने कहा कि सपा समर्थकों को पोलिंग बूथों के आसपास फटकने तक नहीं दिया जा रहा है और उन्हें लगातार डराया-धमकाया जा रहा है।
‘लखनऊ जाकर कबूल कर लूंगा इस्लाम’
चुनाव में कथित धांधली से आहत डॉ. आकाश अग्रवाल ने धर्म परिवर्तन तक का बड़ा ऐलान कर दिया। उन्होंने कहा कि उन्हें हार-जीत से कोई फर्क नहीं पड़ता है, क्योंकि वह एक आजाद देश के नागरिक हैं और यह फैसला उनका खुद का होगा कि उन्हें किस पार्टी से चुनाव लड़ना है या नहीं। लेकिन जिस तरह का बर्ताव उनके साथ किया जा रहा है, वह ऐसे सनातन में नहीं रहना चाहते। उन्होंने कहा कि वह जल्द ही लखनऊ की शाही ईदगाह जाएंगे और वहां जाकर इस्लाम कबूल कर लेंगे।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ रोने का वीडियो
डॉ. आकाश अग्रवाल का यह बयान और रोने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। सपा प्रत्याशी के इस कदम के बाद राज्य की राजनीति में अचानक हलचल तेज हो गई है। एक तरफ जहां विपक्ष इसे लोकतंत्र और चुनाव निष्पक्षता की हत्या करार दे रहा है, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय प्रशासन इन सभी आरोपों को खारिज करते हुए शांतिपूर्ण मतदान संपन्न कराने का दावा कर रहा है।
