यूपी समेत पांच राज्यों में चुनावी तारीखों पर पेच, बोर्ड परीक्षा और अर्धकुंभ बनेंगे चुनौती

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उत्तर प्रदेश समेत पांच राज्यों में 2027 के विधानसभा चुनाव का कार्यक्रम तय करना निर्वाचन आयोग के लिए तारीखों से अधिक व्यवस्थाओं के तालमेल की परीक्षा होगा। यूपी में बोर्ड परीक्षाएं, उत्तराखंड में हरिद्वार का प्रस्तावित अर्धकुंभ और पांचों राज्यों में एक साथ चुनाव कराने के लिए सुरक्षा बलों की जरूरत कार्यक्रम निर्धारण को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक हो सकते हैं। हालांकि वर्ष 2017 और 2022 में बोर्ड परीक्षाओं के दौरान ही जनवरी में घोषणा, फरवरी के आखिर से मतदान और मार्च में प्रक्रिया पूरी हुई।

दोनों पिछले चुनावों में आयोग ने जनवरी में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा, मणिपुर और पंजाब के कार्यक्रम घोषित किए थे। वर्ष 2017 में चार जनवरी और 2022 में आठ जनवरी को घोषणा हुई। यूपी में दोनों बार सात चरणों में मतदान फरवरी में शुरू होकर मार्च के पहले सप्ताह तक चला। यह समानता बताती है कि आयोग ने तब पांचों राज्यों के चुनाव एक व्यापक समय-सीमा में कराए थे। हालांकि, हर चुनाव में परिस्थितियां अलग होती हैं और चरणों की संख्या भी सुरक्षा तथा प्रशासनिक जरूरतों के आधार पर तय होती है।

बोर्ड परीक्षा के बाद का विकल्प, पर फैसला तय नहीं

यूपी बोर्ड ने 2027 की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षाएं पांच से 24 फरवरी तक कराने का कार्यक्रम जारी किया है। 50 लाख से अधिक विद्यार्थियों के पंजीकरण के कारण परीक्षा केंद्रों, शिक्षकों और प्रशासनिक अमले की व्यवस्था महत्वपूर्ण होगी। यही शिक्षक और कर्मचारी चुनावी प्रक्रिया में भी लगाए जा सकते हैं। ऐसे में परीक्षा और मतदान की तारीखों में टकराव से बचना प्रशासनिक दृष्टि से जरूरी होगा। परीक्षाएं समाप्त होने के बाद मतदान कराने का विकल्प आयोग के विचार में आ सकता है। आयोग को मतदान केंद्रों की व्यवस्था, कानून-व्यवस्था, केंद्रीय सुरक्षा बलों की उपलब्धता और अन्य राज्यों के कार्यक्रम का भी आकलन करना होगा।

उत्तराखंड में अर्धकुंभ भी अहम कारक

उत्तराखंड में विधानसभा का कार्यकाल 28 मार्च 2027 को पूरा हो रहा है, जबकि हरिद्वार में एक जनवरी से 30 अप्रैल तक अर्धकुंभ आयोजित करने की तैयारी है। इस दौरान दस स्नान पर्व प्रस्तावित हैं, जिनमें चार अमृत स्नान शामिल हैं। धार्मिक आयोजन के दौरान पुलिस बल, यातायात प्रबंधन और प्रशासनिक संसाधनों की बड़ी जरूरत होगी। इसलिए चुनाव और अर्धकुंभ की व्यवस्थाओं में समन्वय अहम हो सकता है।