- चार दिन, चार आयाम और एक सोच—हर क्षेत्र में सक्रिय डॉ. राजेश्वर सिंह, प्रकृति से आस्था और सेवा से अपनी मिट्टी तक निभाया हर रिश्ता
पीलीभीत के जंगलों से मुंबई के एंटीलिया तक, दिव्यांग बच्चों के बीच से गांव की चौपाल तक दिखी एक जनप्रतिनिधि की बहुआयामी सक्रियता
लखनऊ। जनप्रतिनिधि की भूमिका केवल विधानसभा क्षेत्र तक सीमित नहीं होती, बल्कि समाज, प्रकृति, आस्था, सेवा और मानवीय संवेदनाओं से जुड़े अलग-अलग सरोकारों के बीच उसकी सक्रियता दिखाई देती है। डॉ. राजेश्वर सिंह के पिछले चार दिनों की गतिविधियों में भी ऐसे ही अलग-अलग आयाम देखने को मिले। चार दिनों में उन्होंने प्रकृति और वन्यजीव संरक्षण से लेकर श्रद्धालुओं की आस्था, सामाजिक संवेदना, दिव्यांग बच्चों के प्रोत्साहन और ग्रामीण संस्कृति से जुड़ाव तक विभिन्न क्षेत्रों में सहभागिता की।
- पीलीभीत में प्रकृति और वन्यजीव संरक्षण पर संवाद
पहले दिन पीलीभीत के जंगलों में प्रख्यात वन्यजीव फिल्मकार एस. नल्लामुथु के साथ पर्यावरण, जंगल और बाघ संरक्षण से जुड़े विषयों पर संवाद किया। जंगलों और वन्यजीवों की सुरक्षा में जुटे बाघ मित्रों के लिए बेहतर सुविधाओं की आवश्यकता पर भी पहल की गई। इस दौरान प्रकृति संरक्षण को आने वाली पीढ़ियों की जिम्मेदारी से जोड़ते हुए जंगल और वन्यजीवों के संरक्षण पर जोर दिया गया।

- श्रद्धालुओं की आस्था के साथ खड़े हुए
इसी दौरान खाटू श्याम जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए श्याम रथ को हरी झंडी दिखाई। यह पहल लोगों की धार्मिक आस्था और भावनाओं से जुड़े विषयों के प्रति सहभागिता का उदाहरण रही। इसके साथ ही अपने क्षेत्र में शोक-संतप्त परिवारों के घर पहुंचकर दुःख में सहभागी बने और बेटे के निधन के बाद दुखी मां को सांत्वना दी। यह उनके दौरे का वह पक्ष रहा, जहां किसी औपचारिक कार्यक्रम से अधिक मानवीय संवेदना महत्वपूर्ण रही।

- एंटीलिया में भारतीय संस्कृति और आस्था का संगम
दूसरे दिन मुंबई स्थित एंटीलिया में गणेश पूजा में शामिल हुए। मुकेश अंबानी और उनके परिवार के साथ देश-विदेश की कई जानी-मानी हस्तियां और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े अतिथि मौजूद रहे। अमेरिकी राजदूत, अमेरिकी राष्ट्रपति की बेटी-दामाद, उनके परिजन तथा अभिनेता संजय दत्त सहित अनेक विशिष्ट लोग इस आयोजन का हिस्सा बने। भव्य आयोजन के बीच गणपति पूजा भारतीय संस्कृति और आस्था को जोड़ने वाला केंद्र बनी।
एंटीलिया की भव्यता और आत्मीय आतिथ्य का अनुभव लेने के बाद डॉ. राजेश्वर सिंह की सहजता अगले ही पड़ाव पर सरोजनीनगर के कटी बगिया चौराहे पर दिखाई दी, जहां उन्होंने कुल्हड़ वाली चाय का आनंद लिया। एक ओर महानगर की भव्यता और दूसरी ओर अपने क्षेत्र की साधारण चाय—दोनों जगहों पर सहज अपनत्व की तस्वीर सामने आई।

- दिव्यांग बच्चों के सपनों को दिया प्रोत्साहन
तीसरे दिन दृष्टि संस्था में दिव्यांग बच्चों के बीच पहुंचे। बच्चों की प्रतिभा, हौसले और सपनों को प्रोत्साहित किया तथा उनके साथ समय बिताया। इस पहल के माध्यम से समाज के संवेदनशील वर्ग के साथ खड़े होने और उनकी क्षमताओं को पहचानने का संदेश सामने आया।
- गांव की मिट्टी और लोक संस्कृति से जुड़ाव
चौथे दिन अपने विधानसभा क्षेत्र के सुदूर गांव में राम ढोल की थाप के बीच ग्रामीणों के साथ सहभागिता की। यहां न कोई औपचारिक मंच था और न ही किसी बड़े आयोजन की चमक, बल्कि गांव की मिट्टी, लोक संस्कृति और अपने लोगों के बीच सहज संवाद था।
- चार दिन, अलग-अलग क्षेत्र और एक निरंतर जुड़ाव
पीलीभीत के जंगलों से मुंबई के एंटीलिया तक, एंटीलिया के व्यंजनों से कटी बगिया की कुल्हड़ वाली चाय तक, देश-दुनिया की जानी-मानी हस्तियों से दिव्यांग बच्चों तक और महानगर की भव्यता से गांव की मिट्टी तक—इन चार दिनों की गतिविधियों में अलग-अलग क्षेत्र दिखाई दिए। प्रकृति संरक्षण, आस्था, सामाजिक संवेदना, सेवा और ग्रामीण संस्कृति जैसे विषय अलग थे, लेकिन हर जगह सहभागिता और लोगों से जुड़ाव का भाव दिखाई दिया।
डॉ. राजेश्वर सिंह की इन चार दिनों की सक्रियता इस बात को रेखांकित करती है कि सार्वजनिक जीवन में एक व्यक्ति की भूमिका अनेक क्षेत्रों तक विस्तार ले सकती है। मंच और परिवेश बदल सकते हैं, लेकिन प्रकृति, समाज, आस्था और अपने लोगों के साथ जुड़ाव की भावना निरंतर बनी रह सकती है।
