बात सिर्फ़ एक दवा की नहीं, ज़िंदगी की है सिप्ला की दवा ‘Reactin Plus का’लाइसेंस रद्द

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कल तक जहाँ फ़ूड डिपार्टमेंट में मिलावटखोरों की नींद हराम थी, आज चिकित्सा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में वही खौफ उतर आया है। जब महाराष्ट्र FDA कमिश्नर के रूप में तुकाराम मुंडे ने पुणे में देश की दिग्गज फार्मा कंपनी Cipla के गिरेबान पर हाथ डाला, तो एक बात साफ़ हो गई— यहाँ कानून किसी के ब्रांड का आकार देखकर नहीं झुकेगा।
बात सिर्फ़ एक दवा की नहीं, ज़िंदगी की है
सिप्ला की दवा ‘Reactin Plus’ के प्रचार और लेबलिंग में नियमों की सीधी धज्जियां उड़ाई जा रही थीं। जिस दवा को लोग दर्द और बीमारी में भरोसे के साथ हलक से नीचे उतारते हैं, उसी दवा के साथ मुनाफाखोरी का खेल चल रहा था।
तुकाराम मुंडे ने न सिर्फ़ ₹11.19 लाख से अधिक का स्टॉक सीधे जब्त किया, बल्कि बाज़ार में बिक चुकी दवाओं को तुरंत वापस मंगाने (Recall) का आदेश देकर कंपनी का लाइसेंस तक रद्द कर दिया।
एक गरीब बाप जब अपनी गाढ़ी कमाई से बच्चे के लिए मेडिकल स्टोर से दवा खरीदता है, तो वह दवा पर नहीं, सिस्टम पर भरोसा करता है। और जब वही सिस्टम मुनाफाखोरों के आगे बिक जाता है, तो मौत सिर्फ़ बीमारी से नहीं, भरोसे के टूटने से होती है।
तुकाराम मुंडे का बार-बार ट्रांसफर हुआ, उन्हें हाशिए पर धकेलने की हर मुमकिन कोशिश हुई, लेकिन यह अफ़सर जहाँ भी बैठता है, वहीं से कानून का राज शुरू हो जाता है।
जब तक ऐसे अफ़सर मैदान में हैं, आम इंसान की उम्मीदें ज़िंदा हैं। डर उसी को होना चाहिए जिसने गलत किया है, क्योंकि अब एक-एक सेक्टर का हिसाब होगा!
सलाम है ऐसे निर्भीक और ईमानदार अफ़सर के जज़्बे को!