मनुस्मृति पर कांग्रेस को घेरा, शाह बानो से तीन तलाक तक डॉ. राजेश्वर सिंह ने उठाए सवाल

Lucknow
लखनऊ। मनुस्मृति और महिलाओं के अधिकारों को लेकर कांग्रेस के रुख पर सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने तीखा हमला बोला है। उन्होंने कांग्रेस पर महिला अधिकारों और समानता के मुद्दे पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि महिला सम्मान की बात करने से पहले कांग्रेस को अपने राजनीतिक इतिहास और पुराने फैसलों का जवाब देना चाहिए।
  • शाह बानो मामले को लेकर कांग्रेस पर सवाल

डॉ. राजेश्वर सिंह ने 1985-86 के शाह बानो मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने 1986 में मुस्लिम महिला (तलाक अधिकार संरक्षण) अधिनियम पारित कर सुप्रीम कोर्ट के शाह बानो को गुजारा भत्ता देने संबंधी फैसले को निष्प्रभावी कर दिया था। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या उस समय राजनीतिक दबाव और वोट बैंक की राजनीति को महिला अधिकारों से ऊपर रखा गया था।

  • तीन तलाक कानून पर भी साधा निशाना

विधायक ने तीन तलाक कानून, 2019 को लेकर भी कांग्रेस के रुख पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि जब तीन तलाक को अपराध घोषित करने वाला कानून संसद में लाया गया, तब कांग्रेस ने इसके प्रमुख प्रावधानों का विरोध किया। डॉ. सिंह ने पूछा कि मुस्लिम महिलाओं के अधिकार और सम्मान की बात करने वाली कांग्रेस उस समय उनके साथ मजबूती से क्यों नहीं खड़ी हुई।

  • समान नागरिक संहिता पर उठाया सवाल

डॉ. राजेश्वर सिंह ने संविधान के अनुच्छेद 44 का हवाला देते हुए समान नागरिक संहिता को लेकर भी कांग्रेस से जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि दशकों तक सत्ता में रहने के बावजूद कांग्रेस ने इस दिशा में ठोस पहल क्यों नहीं की। उन्होंने सवाल किया कि महिलाओं के अधिकारों में समानता की बात करने वाली पार्टी ने संवैधानिक लक्ष्य को आगे बढ़ाने के लिए क्या कदम उठाए।

  • अलग-अलग कानूनों पर भी सवाल

उन्होंने कहा कि स्वतंत्र भारत में 1955-56 के दौरान हिंदू व्यक्तिगत कानूनों में व्यापक सुधार किए गए, जबकि मुस्लिम व्यक्तिगत कानून में सुधार को लेकर अलग रवैया देखने को मिला। डॉ. सिंह ने सवाल किया कि महिलाओं के अधिकार धर्म या समुदाय के आधार पर अलग-अलग होने चाहिए या सभी महिलाओं को समान अधिकार मिलना चाहिए।

  • मनुस्मृति को लेकर चयनात्मक विरोध का आरोप

डॉ. राजेश्वर सिंह ने कांग्रेस के मनुस्मृति संबंधी बयानों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यदि उद्देश्य वास्तव में महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करना है तो सभी धार्मिक और सामाजिक परंपराओं में महिलाओं से जुड़े कथित भेदभावपूर्ण प्रावधानों के लिए समान मापदंड होना चाहिए। उन्होंने इसे कांग्रेस का चयनात्मक विरोध बताया।

  • महिला अधिकारों पर समान मापदंड की मांग

डॉ. सिंह ने कहा कि महिलाओं के अधिकारों की लड़ाई केवल भाषणों और सामाजिक माध्यमों तक सीमित नहीं होनी चाहिए। वास्तविक प्रतिबद्धता हर महिला के अधिकार, गरिमा और समानता के लिए बिना किसी राजनीतिक दबाव के समान रूप से आवाज उठाने में है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में तीन तलाक के खिलाफ कानून बनाकर मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों और गरिमा की रक्षा की दिशा में कदम उठाया गया। उनके अनुसार महिला सशक्तिकरण का अर्थ प्रत्येक महिला को समान अधिकार, सम्मान और न्याय उपलब्ध कराना है।

अंत में डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि कांग्रेस को मनुस्मृति पर सवाल उठाने से पहले शाह बानो से लेकर तीन तलाक तक अपने राजनीतिक रुख का जवाब देना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि समानता सिद्धांत है तो उसका मापदंड भी सभी के लिए समान होना चाहिए और महिला अधिकार किसी राजनीतिक दल की सुविधा नहीं, बल्कि संवैधानिक समानता, गरिमा और न्याय का विषय हैं।