लखनऊ पुलिस का बड़ा एक्शन, धर्मांतरण गिरोह के सात आरोपी पहुंचे जेल

# ## Lucknow

ईसाई धर्म अपनाने का दबाव बनाकर धर्मांतरण करवाने के मामले में पकड़े गए सातों आरोपियों को मोहनलालगंज पुलिस ने गिरफ्तार कर शुक्रवार को जेल भेज दिया गया। जांच में सामने आया कि गिरोह बीमारी के इलाज, आर्थिक सहायता, विवाह में मदद समेत अन्य झांसे देकर लोगों को ईसाई धर्म अपनाने के लिए उकसाते थे। पूछताछ में आरोपियों से पुलिस को कई अहम जानकारियां मिली हैं। आरोपियों के पास से बोलेरो, धार्मिक पुस्तक, धर्म परिवर्तन संबंधित कई बुकलेट, विवाह विवरण पत्र व बैंक स्टेटमेंट की कॉपी बरामद की है।

इंस्पेक्टर रामबाबू सिंह ने बताया कि बुधवार रात भरसवा गांव में चंद्रभान के घर आयोजित बैठक के दौरान ग्रामीणों ने धर्मांतरण का आरोप लगाते हुए विरोध-प्रदर्शन किया था। ग्रामीण अमित कुमार की शिकायत पर मोहनलालगंज पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज की थी। जांच के बाद पुलिस ने डेनियल निवासी विरुधुनगर, तमिलनाडु हालपता ग्राम हरिकंशगढ़ी मोहनलालगंज, उसकी पत्नी सुबला, चंद्रभान व उसकी पत्नी आरती, सीमा पत्नी मनोज निवासी ग्राम भरसवा बरवलिया, अजय रावत निवासी ठाकुरखेड़ा मोहनलालगंज और उसकी पत्नी शीला को गिरफ्तार कर लिया। शुक्रवार को सभी आरोपियों को कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया।

इंस्पेक्टर ने बताया कि एक गवाह को पैर दर्द के इलाज के बहाने चर्च ले जाया गया, जहां बाद में उसका धर्मांतरण कराया गया। स्थानीय लोगों ने पुलिस को बताया कि करीब 25 से 30 वर्ष पहले फुलवरिया और आसपास के गांवों में ईसाई समुदाय के कुछ ही परिवार रहते थे, लेकिन समय के साथ उनकी संख्या बढ़ती गई। फुलवरिया से लेकर गौरा तक कई चर्च स्थापित हुए, जहां प्रत्येक रविवार को प्रार्थना सभाएं आयोजित होती हैं।

बाला सुब्रमण्यम से बन गया था डैनियल

इंस्पेक्टर के मुताबिक, पूछताछ में मुख्य आरोपी डैनियल ने बताया कि उसका पहले नाम बाला सुब्रमण्यम था। 16 वर्ष की आयु में उसकी मुलाकात सुबला से हुई, जो कन्याकुमारी की थी और ईसाई धर्म को मानने वाली थी। सुबला के कहने पर हिंदू धर्म त्यागकर ईसाई धर्म अपनाकर शादी कर ली। जिसके बाद एफजीपीसी चर्च कन्याकुमारी के आदेश पर धर्म के प्रचार प्रसार के लिए वे लोग वर्ष 1998 में लखनऊ आए थे। आरोपी डैनियल को वाराणसी सर्किल का पास्टर बनाया गया। आरोपी ने कबूला कि अधिक से अधिक लोगों को जुड़वाने के लिए चर्च से टारगेट दिया जाता था, इस पर उन्हें आर्थिक मदद भी मिलती है।