अमेठी: उत्तर प्रदेश के अमेठी में बेसिक शिक्षा विभाग के वित्त एवं लेखा कार्यालय में हुए 7 करोड़ रुपये से अधिक के महाघोटाले ने सभी की नींदे उड़ा कर रख दी है। इसी को लेकर जांच अब केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने पूरी तरह अपने हाथों में ले ली है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के कड़े रुख और निर्देश के बाद हरकत में आई CBI की 8 स्पेशल टीमों ने आज अमेठी में एक साथ दस्तक दी। टीमों ने जिले के अलग-अलग इलाकों में ताबड़तोड़ छापेमारी की और मामले से जुड़े संदिग्धों से घंटों पूछताछ की है।
CBI की डीआईजी शिवानी तिवारी के नेतृत्व में चल रही इस महा-कार्रवाई की आंच सिर्फ अमेठी तक सीमित नहीं है। इस घोटाले के तार कई जिलों से जुड़े होने के कारण लखनऊ, प्रतापगढ़, कुशीनगर और अयोध्या में भी एक साथ छापेमारी की जा रही है, जिससे पूरे शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है।
कैसे हुआ 7 करोड़ का फर्जीवाड़ा?
इस पूरे घोटाले का भंडाफोड़ तब हुआ जब लेखाधिकारी किशन गुप्ता की तहरीर पर अमेठी के गौरीगंज कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया गया था। विभाग में तैनात कुछ शातिर कर्मचारियों ने वेतन, भत्ते और अन्य सरकारी मदों के पैसों में बड़े स्तर पर हेरफेर किया।
अधिकारियों की नाक के नीचे इन कर्मचारियों ने सरकारी खजाने से करोड़ों रुपये निकालकर कई शिक्षकों के निजी बैंक खातों में अवैध रूप से ट्रांसफर कर दिए।
इन 8 ठिकानों पर छापेमारी, बाबू और संविदा कर्मी रडार पर
सीबीआई की 8 अलग-अलग टीमों ने आज अमेठी के लोधवरिया और पूरे यदुराम पांडेय समेत 8 ठिकानों पर छापेमारी की। सूत्रों के मुताबिक, इस पूरे खेल में वित्त एवं लेखा विभाग के कई बड़े नाम सामने आ रहे है।
