किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) के यूरोलॉजी विभाग में करोड़ों रुपये के दवा घोटाले में सोमवार को एक और डॉक्टर पर गाज गिर सकती है। जांच समिति ने शनिवार को विभाग के दवा नोडल अधिकारी डॉ. विवेक सिंह से घंटों पूछताछ की थी। पूछताछ का केंद्र वे इंडेंट और बिल रहे, जिन पर ऐसे मरीजों के नाम दर्ज थे, जिनकी मौत पहले ही हो चुकी थी। समिति ने सवाल किया कि मृत मरीजों के नाम पर दवाओं की मांग कैसे जारी हुई और उन दस्तावेजों पर उनके हस्ताक्षर किस आधार पर किए गए।
सूत्रों के मुताबिक, डॉ. विवेक सिंह इन सवालों का संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। जांच समिति के अध्यक्ष डॉ. केके सिंह ने बताया कि सोमवार को डॉ. विवेक सिंह से दोबारा पूछताछ की जाएगी। यदि वे संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दे पाए तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की संस्तुति की जा सकती है। जांच में अब तक सामने आया है कि यूरोलॉजी विभाग में कई ऐसे मरीजों के नाम पर दवाओं का इंडेंट जारी किया गया, जिनकी मृत्यु पहले ही हो चुकी थी। रिकॉर्ड में उन्हें भर्ती दिखाकर दवाएं मंगाई गईं और संबंधित बिल भी तैयार किए गए। इतना ही नहीं, इन दस्तावेजों पर विभागीय अधिकारियों के हस्ताक्षर भी पाए गए हैं।
दवाएं आखिर गईं कहां
जांच समिति अब इस बात की तह तक पहुंचने में जुटी है कि मृत मरीजों के नाम पर मंगाई गई दवाओं का वास्तविक उपयोग कहां हुआ और उन्हें किस तरह खपाया गया। समिति ने रिकॉर्ड की जांच के दौरान ऐसे कई संदिग्ध मामलों की पहचान की है, जिनमें प्रशासनिक और विभागीय स्तर पर गंभीर अनियमितताओं के संकेत मिले हैं।
अंतरिम रिपोर्ट सौंपी, जांच अंतिम चरण में
डॉ. केके सिंह ने बताया कि मामले से संबंधित अंतरिम रिपोर्ट प्रशासन को सौंप दी गई है, हालांकि कई बिंदुओं की जांच अभी जारी है। सोमवार को जांच पूरी करने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि समिति सभी दस्तावेजों और तथ्यों की गहन पड़ताल कर रही है। जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी और किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।
केजीएमयू में अत्याधुनिक तकनीक से फेफड़ों के रोगों की होगी सटीक पहचान
केजीएमयू के चेस्ट मेडिसिन विभाग ने फेफड़ों की जटिल बीमारियों की जांच गाइडेड रेडियल एंडोब्रोंकियल अल्ट्रासाउंड (ईबीयूएस) तकनीक से शुरू कर दी है। ये सुविधा देने वाला चेस्ट मेडिसिन विभाग प्रदेश का पहला विभाग बन गया है। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) चेस्ट मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष डॉ. सूर्यकांत ने बताया कि यह उपलब्धि केवल एक नई तकनीक की शुरुआत नहीं, बल्कि बेहतर मरीज सेवाओं और सटीक उपचार के प्रति विभाग की प्रतिबद्धता का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि इस तकनीक के जरिए फेफड़ों की बीमारियों का निदान पहले की तुलना में अधिक सटीक और प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा।
