Uttrakhand:नैनीताल जिले में बढ़ा बाघ-तेंदुए का खतरा, एक साल में गई कई लोगों की जान

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नैनीताल जिले में पिछले एक वर्ष के दौरान बाघ और तेंदुए के हमलों में कई लोगों की मौत होने से मानव-वन्यजीव संघर्ष गंभीर होता जा रहा है। जंगल से सटे ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार बढ़ती घटनाओं से लोगों में भय का माहौल बना हुआ है। वन विभाग ने संवेदनशील क्षेत्रों में गश्त बढ़ाने और निगरानी के लिए कैमरा ट्रैप लगाने की बात कही है।

हाल ही में हल्द्वानी के कालाढूंगी रोड क्षेत्र में एक 66 वर्षीय महिला गंगा देवी पर जंगली जानवर ने हमला कर दिया, जिससे उनकी मौत हो गई। महिला जंगल में चारा लेने गई थीं, तभी यह घटना हुई। इसी तरह नैनीताल जिले के धारी, ओखलकांडा और रामगढ़ क्षेत्रों में तीन महिलाओं की मौत के बाद वन विभाग ने संदिग्ध तेंदुए को पकड़ने के लिए अभियान चलाया। दो सप्ताह तक चले अभियान में कैमरा ट्रैप और पिंजरे लगाए गए, जिसके बाद एक तेंदुए को पकड़ लिया गया। घटना के बाद स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों को भी अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा था।

इसके अलावा भीमताल क्षेत्र में भी हाल के महीनों में दो महिलाओं की मौत की घटनाएं सामने आईं, जिसके बाद ग्रामीणों ने वन विभाग से ठोस कार्रवाई की मांग की। लगातार बढ़ते हमलों से ग्रामीण क्षेत्रों में दहशत का माहौल बना हुआ है। वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि जंगलों में प्राकृतिक शिकार की कमी, बढ़ती मानव गतिविधियां और वन क्षेत्रों का सिकुड़ना इन घटनाओं का मुख्य कारण है। राज्य स्तर पर भी बाघ और तेंदुए के हमलों में वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे संवेदनशील जिलों में अलर्ट जारी किया गया है। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि संवेदनशील क्षेत्रों में क्विक रिस्पांस टीम तैनात कर दी गई है और लोगों से जंगल में अकेले न जाने की अपील की जा रही है।

संवेदनशील क्षेत्र

हल्द्वानी-कालाढूंगी क्षेत्र
भीमताल-ओखलकांडा क्षेत्र

रामगढ़-धारी क्षेत्र
ज्योलीकोट और आसपास के गांव

ग्रामीणों की मांग
संवेदनशील क्षेत्रों में गश्त बढ़ाई जाए
पिंजरे और कैमरा ट्रैप लगाए जाएं
प्रभावित परिवारों को मुआवजा दिया जाए
बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा के लिए विशेष योजना बनाई जाए