उत्तर भारत इन दिनों एक्सट्रीम वेदर की चपेट में है। लगातार हो रही बारिश और असामान्य मौसम ने जनजीवन, खेती और स्वास्थ्य सभी को प्रभावित किया है। यह एक्सट्रीम वेदर जलवायु परिवर्तन का असामान्य रूप है, जो अब आम जनता के अनुभव में भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान (एरीज) के निदेशक डॉ. मनीष नाजा ने बताया कि भारत में पिछले लगभग दो वर्ष से एक्सट्रीम वेदर का प्रभाव बना हुआ है। इस बार की सर्दियां सूखे के साथ बीती, जबकि मार्च में शुरू हुई बारिश अप्रैल के प्रथम सप्ताह तक जारी रही। इससे पहले 2025 का वर्ष भी एक्सट्रीम वेदर के प्रभाव के साथ बीता था। डॉ. नाजा ने बताया कि एक्सट्रीम वेदर का मतलब है लंबे समय तक मौसम का एक जैसा रहना।
यह सामान्य मौसम के विपरीत रहने वाला असामान्य मौसम होता है, जो बहुत अधिक तीव्र और लंबे समय तक टिके रहता है। पिछले साल 2025 की सर्दी सूखे के साथ बीती थी और मई की शुरुआत से प्री-मानसून की बारिश शुरू हुई, जो सितंबर अंत तक जारी रही। इसके बाद अक्टूबर से फरवरी अंत तक सूखे की स्थिति बनी रही। अब लगातार वर्षा देखने को मिल रही है। डॉ. नाजा के अनुसार, एक्सट्रीम वेदर का मुख्य कारण जलवायु परिवर्तन है। लगभग डेढ़ दशक से इसका असर बढ़ना शुरू हुआ और पिछले दो सालों में इसका प्रभाव और भी स्पष्ट दिखाई देने लगा। एक्सट्रीम वेदर को लेकर एक दशक पहले से वैज्ञानिकों के बीच चर्चाएं हो रही थीं। अब इसका असर मौसम के साथ-साथ खेती, स्वास्थ्य और सामाजिक जीवन पर भी पड़ रहा है।
वायु प्रदूषण पर नियंत्रण जरूरी
डॉ. मनीष नाजा का कहना है कि ग्लोबल वार्मिंग, जलवायु परिवर्तन और एक्सट्रीम वेदर जैसी मौसमी समस्याओं का समाधान वायु प्रदूषण की रोकथाम में संभव है। कार्बन डाईऑक्साइड गैस की वृद्धि को रोकना होगा और अन्य ग्रीनहाउस गैसों के अधिक उत्सर्जन पर अंकुश लगाना होगा। तभी वैश्विक तापमान को कम किया जा सकता है और जलवायु को अपनी प्राकृतिक अवस्था में लाया जा सकता है। यदि इन दो समस्याओं का समाधान हो जाता है, तो एक्सट्रीम वेदर जैसी गतिविधियां स्वयं ही कम हो जाएंगी।
आज आकाशीय बिजली, ओलावृष्टि और आंधी की संभावना
बुधवार को खराब मौसम को लेकर प्रशासन ने चेतावनी जारी की है। एडीएम शैलेंद्र सिंह नेगी ने बताया कि मौसम विभाग के अनुसार 8 अप्रैल को जनपद में कहीं-कहीं आकाशीय बिजली, ओलावृष्टि और 40-60 किमी/घंटा की तेज हवाओं की संभावना है। लोगों से आवागमन में सावधानी बरतने, आपदा कंट्रोल रूम और नोडल अधिकारियों को हाई अलर्ट पर रहने का आदेश दिया गया। एनएच, पीडब्ल्यूडी, पीएमजीएसवाई, एडीबी विभागों को मोटर मार्ग बाधित होने पर तुरंत खुलवाने के निर्देश। राजस्व, ग्राम विकास अधिकारी, ग्राम पंचायत अधिकारी, चौकी व थाने आपदा उपकरणों सहित तैयार रहें और टॉर्च, हेलमेट, छाता व आवश्यक सामग्री वाहन में रखें।
नैनीताल में हल्की बूंदाबांदी ने गिराया तापमान
मंगलवार को हल्की बूंदाबांदी और ठंडी हवाओं के कारण नैनीताल में तापमान गिर गया। पूरे दिन ठंड का एहसास बना रहा। नगर के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हल्की ओलावृष्टि भी हुई। मौसम विभाग ने बुधवार को भी खराब मौसम, तेज आंधी, ओलावृष्टि और आकाशीय बिजली गिरने की संभावना जताई है। जिला प्रशासन ने भी चेतावनी जारी की है। नगरवासियों को दिन में गर्म ऊनी कपड़े पहनने की आवश्यकता पड़ी। जीआईसी मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार अधिकतम तापमान 22 और न्यूनतम 12 डिग्री सेल्सियस रहा। आद्रता अधिकतम 90 और न्यूनतम 60 प्रतिशत दर्ज की गई।
