नए वित्तीय साल में वीबी जीराम जी (विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन ग्रामीण) की तैयारी तेज है। इसकी पृष्ठभूमि में जिले में मनरेगा की शुरुआत से वित्तीय साल 2024-25 तक की लगभग 15 हजार अधूरी परियोजनाओं को पूरा करने पर फोकस है। मनरेगा के तहत कार्यों की नई आईडी जनरेट नहीं की जा रही है। परियोजनाओं पर मजदूरों की संख्या भी कम हो गई है।
बता दें कि भारत सरकार ने मनरेगा का नाम वीबी जी राम जी कर दिया है। इसके नियम कायदे में भी बदलाव किया गया है। इसकी सूचना जिले तक पहुंच गई है। उम्मीद है कि नए वित्तीय साल में मनरेगा के स्थान पर काम जीराम जी के तहत कराए जाएंगे। इसकी पृष्ठभूमि में अब मनरेगा के समापन की कार्रवाई तेज है। अधूरी परियोजनाओं को इस साल के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य है। जिससे इनके लेखे जोखे से फुरसत मिल जाए।
जिले में मनरेगा साल 2008 में शुरू की गई थी। व्यवस्था यह कि साल समाप्त होने पर चालू परियोजनाओं को अगले साल शामिल करके चलाया जाता रहा है। साल 2026 तक अधूरी परियोजनाओं की संख्या लगभग लगभग 20 हजार बताई गई है। इसमें अकेले साल 2025-26 में लगभग 44 सौ परियोजनाएं शामिल है। यह तो चल ही रही हैं।
यदि इनको बाहर कर दिया जाए तो साल 2008 से 2025 तक की लगभग 15 हजार की संख्या में परियोजनाएं लंबित हैं। नए साल में योजना का नाम बदल रहा है। इसलिए पुरानी योजना के नाम की परियोजनाओं को अब पूरा करने पर फोकस है। यह काम मार्च की शुरुआत से ही शुरू कर दिया गया था। मार्च के समापन तक बड़ी संख्या में परियोजनाओं को पूरा भी कर लिया जाएगा।
अधूरी परियोजनाओं को पूरा करने का प्रयास
इस लक्ष्य को पूरा करने के मद्देनजर मनरेगा के तहत नई परियोजनाओं की आईडी जनरेट नहीं की जा रही है। इसलिए मनरेगा में नई परियोजनाएं शुरू नहीं हो रही हैं। इसके साथ ही मजदूरों की संख्या भी परियोजनाओं पर कम हो गई है। जिले की लगभग 250-300 ग्राम पंचायतों में लगभग चार से पांच हजार की संख्या में परियोजनाओं पर मजदूर काम कर रहे हैं।
डीसी मनरेगा उपेंद्र कुमार पाठक बताते हैं कि नए साल से योजना का नाम बदल रहा है। इसकी तैयारी चल रही है। प्रयास है कि पुरानी अधूरी परियोजनाओं को पूरा करा लिया जाए। इससे मनरेगा में पेंडिंग परियोजनाएं नहीं रहेंगी। जीराम जी के संचालन में सुविधा होगी।
33 लाख का मानव दिवस सृजन, 79 करोड़ तक भुगतान
-मनरेगा में चल रहे वित्तीय साल में अब तक लगभग 33 लाख मानव दिवस का सृजन किया गया। श्रम के तहत भुगतान की राशि लगभग 80 करोड़ तक पहुंच रही है। इसके अलावा सामग्री और मानदेय के मद में भुगतान अलग से हैं।
