BBAU में ‘बुद्धिमान और सतत डिजिटल भविष्य के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं उभरती प्रौद्योगिकियाँ ‘ विषय पर हुआ अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन

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  • बीबीएयू में ‘बुद्धिमान और सतत डिजिटल भविष्य के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं उभरती प्रौद्योगिकियाँ ‘ विषय पर हुआ अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन

           बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय में दिनांक 20 मार्च को सूचना प्रौद्योगिकी विभाग की ओर से ‘बुद्धिमान और सतत डिजिटल भविष्य के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं उभरती प्रौद्योगिकियाँ ‘ विषय पर अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने की। इसके अतिरिक्त मंच पर जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के प्रो. टी.वी. विजय कुमार, बीबीएयू‌ के सलाहकार प्रो. मनोज जोशी, सूचना विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विद्यापीठ के संकायाध्यक्ष प्रो. एम.पी. सिंह, सूचना प्रौद्योगिकी विभाग की विभागाध्यक्ष एवं कार्यक्रम संयोजक डॉ. राजश्री, जर्मनी के आर्थोपेडिक सर्जन डॉ. विष्णु अनुराग एवं प्रो. आर.ए. खान मौजूद रहे। सिडनी, आस्ट्रेलिया से डॉ. कुंदन मिश्रा ऑनलाइन माध्यम से कार्यक्रम से जुड़े। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन एवं बाबासाहेब की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित करने के साथ हुई। मंच संचालन का कार्य डॉ. अलका द्वारा किया गया।


            विश्वविद्यालय कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने कहा कि आज के समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हमारे दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुका है, किंतु यह चिंतन का विषय है कि इसका उपयोग किस दिशा में किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि मशीनों के आविष्कार से पहले मनुष्य अपने सभी कार्यों के लिए स्वयं पर निर्भर था और उसमें जोखिम लेने की क्षमता प्रबल थी, परंतु मशीनों के आगमन के साथ मानव की शारीरिक क्षमताओं का बड़ा हिस्सा मशीनों ने प्रतिस्थापित कर दिया। इसके बाद मनुष्य ने अपनी बुद्धिमत्ता का अधिकाधिक उपयोग करते हुए स्वयं को बौद्धिक कार्यों में संलग्न किया। उन्होंने यह भी कहा कि जिस प्रकार नदी के प्रवाह को रोका नहीं जा सकता, उसी प्रकार प्रौद्योगिकी के प्रवाह को भी रोकना संभव नहीं है, इसलिए इसे प्रतिस्थापित करने के बजाय सावधानीपूर्वक इसके साथ सहयोग करना आवश्यक है। प्रो. मित्तल ने विद्यार्थियों को संदेश देते हुए कहा कि वे खुले मन से प्रौद्योगिकी के साथ स्वयं को अनुकूलित करें और ‘लर्न, अर्न और रीलर्न’ के सिद्धांत को अपनाएं अर्थात जो आवश्यक है उसे सीखें, अपनी आवश्यकताओं के अनुसार उससे अर्जन करें और स्वयं को निरंतर अद्यतन रखने के लिए पुनः सीखते रहें। साथ ही उन्होंने विद्यार्थियों को आध्यात्मिकता के माध्यम से स्वयं को गहराई से समझने तथा जीवन में संतुलन, खेल, खुलापन और सीखने की क्षमता जैसी मूलभूत मानवीय गुणों को प्राथमिकता देने पर बल दिया। उन्होंने यह भी प्रेरित किया कि विद्यार्थी तकनीक और एआई का रचनात्मक उपयोग करते हुए उद्यमिता को बढ़ावा दें और अपने ज्ञान को समाज के कल्याण के लिए सार्थक दिशा में प्रयोग करें।
           जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के प्रो. टी.वी. विजय कुमार ने अपने वक्तव्य में कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का सही और संतुलित उपयोग हमारे जीवन को सकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकता है, लेकिन इसका प्रभाव पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि हम इसे किस प्रकार अपनाते हैं। उन्होंने ‘प्लीज राइज एंड डोंट टेक इट अदरवाइज’ का संदेश देते हुए कहा कि हमें एआई को एक सहायक तकनीक के रूप में देखना चाहिए, न कि उस पर पूरी तरह निर्भर होना चाहिए। उन्होंने बताया कि एआई के माध्यम से कार्यों की गति, सटीकता और उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, वहीं इसके दुरुपयोग से निजता में कमी, रोजगार पर प्रभाव और मानवीय क्षमताओं में गिरावट जैसी चुनौतियाँ भी सामने आ सकती हैं। इसलिए आवश्यक है कि हम एआई का उपयोग सोच-समझकर, जिम्मेदारी के साथ और संतुलित दृष्टिकोण अपनाते हुए करें, ताकि इसके लाभों का अधिकतम उपयोग किया जा सके और संभावित हानियों से बचा जा सके।
           आर्थोपेडिक सर्जन डॉ. विष्णु अनुराग ने अपने वक्तव्य में रोबोटिक सर्जरी में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि AI के माध्यम से एमआर‌आई और सीटी स्कैन के विश्लेषण को अधिक सटीक बनाया जा रहा है तथा 3D रिकंस्ट्रक्शन तकनीक से सर्जरी की योजना बेहतर ढंग से तैयार की जा रही है। उन्होंने यह भी बताया कि जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी, स्पोर्ट्स इंजरी के उपचार और पुनर्वास में एआई का प्रभावी उपयोग हो रहा है, जिससे मरीजों को बेहतर और तेजी से उपचार मिल रहा है। उन्होंने आगे कहा कि एआई आधारित तकनीकों से सर्जरी में त्रुटियों की संभावना कम होती है जिससे चिकित्सकों को अधिक सटीक निर्णय लेने में सहायता मिलती है।
          सिडनी, आस्ट्रेलिया के डॉ. कुंदन मिश्रा ने ऑनलाइन माध्यम से जुड़कर विभिन्न क्षेत्रों खासकर बैंकिंग और शिक्षा के क्षेत्र में एआई के बढ़ते प्रभाव पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि एआई नई संभावनाओं के साथ-साथ चुनौतियां भी लेकर आया है, जिससे कार्य करने के तरीके और रोजगार के स्वरूप में बदलाव आ रहा है। इसलिए आवश्यक है कि हम समय के साथ स्वयं को अपडेट करें और नई तकनीकों को सीखकर अपने कौशल को विकसित करें, ताकि बदलते परिवेश में बेहतर अवसर प्राप्त किए जा सकें।
           इस अवसर पर मंचासीन अतिथियों द्वारा अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के सोवेनियर का विमोचन किया गया। इसके पश्चात आयोजन समिति की ओर से मंचासीन अतिथियों को पुष्पगुच्छ, स्मृति चिन्ह एवं शॉल भेंट करके उनके प्रति आभार व्यक्त किया गया। अंत में कार्यक्रम संयोजक डॉ. राजश्री ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
इस अवसर पर प्रतिभागियों के लिए तीन तकनीकी सत्रों का भी आयोजन किया गया। इसके अतिरिक्त एक पैनल चर्चा का आयोजन किया गया, जिसके अंतर्गत ‘सामाजिक बदलाव में एआई की‌‌ भूमिका’ और ‘कार्य का भविष्य और मानव–एआई सहयोग’ जैसे विषयों पर चर्चा की गयी।
           संगोष्ठी के दौरान भव्य कवि सम्मेलन का भी आयोजन किया गया, जिसमें विभिन्न कवियों ने सहभागिता करते हुए अपने विचारों को कविता के माध्यम से सशक्त एवं भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया। कवियों ने सामाजिक, सांस्कृतिक, राष्ट्रप्रेम, समसामयिक मुद्दों तथा मानवीय मूल्यों से जुड़े विविध विषयों पर अपनी रचनाएं प्रस्तुत कर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। साथ ही सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया, जिसमें ग़ज़ल, भक्ति एवं लोकसंगीत की मनमोहक प्रस्तुतियाँ दी गईं।
            कार्यक्रम के दौरान विभिन्न संकायों के संकायाध्यक्ष, विभागाध्यक्ष, शिक्षकगण, गैर शिक्षण अधिकारी एवं कर्मचारी, विभिन्न विद्यालयों से आये विद्यार्थी, विभिन्न संस्थाओं के सदस्य, शोधार्थी एवं बीबीएयू के विद्यार्थी मौजूद रहे।