गुमशुदा लोगों के बढ़ते मामलों पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ का कड़ा रुख

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उत्तर प्रदेश में गुमशुदा लोगों के बढ़ते मामलों पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने प्रदेश में लापता व्यक्तियों के आंकड़ों पर गंभीर चिंता जताते हुए अपर मुख्य सचिव (गृह) और पुलिस महानिदेशक (DGP) को रिकॉर्ड समेत तलब किया है। अगली सुनवाई 23 मार्च को होगी, जिसमें दोनों अधिकारियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया है।यह आदेश न्यायमूर्ति राजन राय और न्यायमूर्ति एके चौधरी की खंडपीठ ने स्वतः संज्ञान जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया।
युवक की गुमशुदगी से खुला मामला
मामला चिनहट निवासी विक्रमा प्रसाद की याचिका से सामने आया। उन्होंने कोर्ट को बताया कि उनका बेटा जुलाई 2024 से लापता है। चिनहट थाने में गुमशुदगी दर्ज कराने के बावजूद पुलिस की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इस पर कोर्ट ने न सिर्फ संबंधित मामले में कार्रवाई के निर्देश दिए, बल्कि पूरे प्रदेश में गुमशुदा लोगों का ब्योरा भी मांगा।
2 साल में 1.08 लाख लोग लापता
अपर मुख्य सचिव (गृह) की ओर से दाखिल शपथपत्र में खुलासा हुआ कि 1 जनवरी 2024 से 18 जनवरी 2026 के बीच प्रदेश में 1,08,300 लोगों की गुमशुदगी दर्ज हुई। इनमें से सिर्फ 9,700 लोगों का ही अब तक पता चल सका है।
इन आंकड़ों पर कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि यह स्थिति दर्शाती है कि गुमशुदा लोगों की तलाश में संबंधित अधिकारियों का काम संतोषजनक नहीं है।
कोर्ट ने जताई गंभीर चिंता
हाईकोर्ट ने मामले को बेहद गंभीर बताते हुए इसे जनहित याचिका के रूप में दर्ज करने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि गुमशुदा व्यक्तियों के मामलों में प्रशासन को अधिक जिम्मेदारी और संवेदनशीलता दिखाने की जरूरत है।
अब सभी की नजर 23 मार्च की अगली सुनवाई पर टिकी है, जब राज्य सरकार को कोर्ट के सामने विस्तृत जवाब देना होगा।