नागार्जुन: जिसने महलों की नहीं, बल्कि खेतों, खलिहानों और आम आदमी की पीड़ा को अपनी कलम की धार बनाया

जन-जन के कवि: बाबा नागार्जुन (वैद्यनाथ मिश्र) को नमन!! आज हम याद कर रहे हैं हिन्दी और मैथिली साहित्य के उस ‘अक्खड़’ और ‘फक्कड़’ फनकार को, जिसने महलों की नहीं, बल्कि खेतों, खलिहानों और आम आदमी की पीड़ा को अपनी कलम की धार बनाया। वैद्यनाथ मिश्र, जिन्हें दुनिया ‘नागार्जुन’ और प्यार से ‘बाबा’ कहती है, […]

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