- वायरलेस ईयरबड्स से लेकर चार्जिंग केबल तक, छोटे गैजेट बन रहे बड़ी पर्यावरणीय चुनौती
लखनऊ। डिजिटल क्रांति ने जीवन को आसान और सुविधाजनक बनाया है, लेकिन इसके साथ इलेक्ट्रॉनिक कचरे यानी ई-वेस्ट का संकट भी तेजी से बढ़ रहा है। Global E-waste Monitor 2024 के अनुसार, वर्ष 2022 में दुनिया में रिकॉर्ड 6.2 करोड़ टन ई-वेस्ट उत्पन्न हुआ, जिसमें से केवल 22.3 प्रतिशत ई-वेस्ट को औपचारिक रूप से एकत्र कर रिसाइकिल किया गया। अनुमान है कि वर्ष 2030 तक वैश्विक ई-वेस्ट बढ़कर 8.2 करोड़ टन तक पहुंच सकता है। डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि तेजी से डिजिटल होते भारत के लिए ई-वेस्ट प्रबंधन अब केवल पर्यावरण संरक्षण का विषय नहीं है, बल्कि जनस्वास्थ्य, संसाधन संरक्षण और भविष्य की अर्थव्यवस्था से भी सीधे जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा है।
- छोटे गैजेट, बड़ी पर्यावरणीय चुनौती
ई-वेस्ट संकट का एक बड़ा हिस्सा छोटे और कम कीमत वाले इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों से जुड़ा है। वायरलेस ईयरबड्स, चार्जिंग केबल, इलेक्ट्रॉनिक खिलौने और अन्य छोटे गैजेट्स अक्सर इस्तेमाल के बाद घरों की दराजों और अलमारियों में पड़े रह जाते हैं या फिर घरेलू कचरे के साथ फेंक दिए जाते हैं। उचित तरीके से रिसाइक्लिंग नहीं होने पर इनमें मौजूद उपयोगी और मूल्यवान संसाधनों का नुकसान होता है तथा पर्यावरण पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि ई-वेस्ट की चुनौती से निपटने के लिए नागरिकों को अपने स्तर पर भी जिम्मेदारी निभानी होगी।
- ‘ई-वेस्ट हंट’ से घरों में छिपे ई-कचरे की तलाश
डॉ. राजेश्वर सिंह ने लोगों से ‘ई-वेस्ट हंट’ अभियान से जुड़ने की अपील की। उन्होंने कहा कि लोग अपने घरों की दराजों, अलमारियों और स्टोरेज स्पेस में पड़े पुराने अथवा अनुपयोगी इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स की पहचान करें और उन्हें अधिकृत ई-वेस्ट कलेक्शन एवं रिसाइक्लिंग केंद्रों तक पहुंचाएं। उन्होंने कहा कि ‘Reduce, Reuse, Repair और Recycle’ को जन-अभियान बनाने की जरूरत है। दिखने में छोटा एक गैजेट भी सामूहिक स्तर पर लाखों टन संसाधनों के नुकसान का कारण बन सकता है।
- Net Zero भारत के लिए जनभागीदारी जरूरी
उन्होंने कहा कि Net Zero Sarojininagar और Environment Warriors जैसी पहलें ई-वेस्ट के प्रति जागरूकता बढ़ाने, जिम्मेदार उपभोग को प्रोत्साहित करने और पर्यावरण संरक्षण में जनभागीदारी मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि ई-वेस्ट प्रबंधन को स्वच्छ, हरित और Net Zero भारत के संकल्प का अभिन्न हिस्सा बनाया जाना चाहिए, ताकि हर अनुपयोगी गैजेट प्रदूषण का कारण बनने के बजाय संसाधनों की पुनर्प्राप्ति का अवसर बने।
