कांग्रेस संगठन में बड़े बदलाव की तैयारी चल रही है. पार्टी अब राष्ट्रीय स्तर पर ऐसे युवा नेताओं को आगे लाने की कोशिश कर रही है, जो सिर्फ पार्टी के पदों तक सीमित न रहें, बल्कि जमीन पर सक्रिय होकर लोगों के बीच काम करें. इसी कवायद के तहत राष्ट्रीय सचिवों की नियुक्ति के लिए इंटरव्यू शुरू किए गए हैं और खास बात यह है कि इन इंटरव्यू में खुद लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी शामिल हो रहे हैं.
राहुल गांधी के साथ प्रियंका गांधी और कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल भी नेताओं से बातचीत कर रहे हैं. अलग-अलग राज्यों से चुने गए नेताओं को दिल्ली बुलाकर उनकी क्षमता, पुराने काम और संगठन में उनकी भूमिका को लेकर सवाल किए जा रहे हैं.
30 नेताओं का हो चुका इंटरव्यू
सोमवार को राष्ट्रीय सचिव पद के लिए करीब 30 नेताओं का इंटरव्यू लिया गया. नेताओं को 10-10 के समूह में बुलाया जा रहा है. राहुल गांधी उम्मीदवारों से उनके अब तक के राजनीतिक सफर, संगठन के लिए किए गए काम और जमीन पर उनकी सक्रियता के बारे में जानकारी ले रहे हैं.
बताया जा रहा है कि जिन नेताओं को इंटरव्यू के लिए बुलाया गया है, उनका कामकाज और राजनीतिक प्रोफाइल पार्टी नेतृत्व के पास पहले से मौजूद है. ऐसे में बातचीत के दौरान केवल सिफारिशों पर नहीं, बल्कि वास्तविक काम के आधार पर उम्मीदवारों को परखा जा रहा है. राहुल गांधी के रायबरेली दौरे से लौटने के बाद इंटरव्यू की प्रक्रिया फिर शुरू होगी. कुल 120 नेताओं के इंटरव्यू लिए जाने हैं. इसके बाद राष्ट्रीय सचिवों की नियुक्ति की जाएगी.
सिफारिश से ज्यादा काम को महत्व
कांग्रेस के इस नए प्रयोग में राजनीतिक वरिष्ठता से ज्यादा काम करने की क्षमता और जमीनी जुड़ाव को महत्व देने की कोशिश दिखाई दे रही है. पार्टी उन नेताओं को भी मौका देना चाहती है, जिन्होंने संगठन के ‘संगठन सृजन’ कार्यक्रम में ऑब्जर्वर के तौर पर काम किया है.
कांग्रेस अपने मौजूदा राष्ट्रीय सचिवों में 60 फीसदी से ज्यादा बदलाव करने की तैयारी में है. इसका मकसद संगठन में नए चेहरों को जगह देना और युवा नेतृत्व को मजबूत करना बताया जा रहा है.
