UP पुलिस भर्ती परीक्षा की आंसर शीट जारी, बोर्ड ने शिकायत के लिए लिंक भी दिया, 23 जून है लास्ट डेट

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उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती के लिए आयोजित परीक्षा की आंसर शीट जारी कर दी गई है। उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड ने आंसर सीट जारी करने के साथ ही आपत्तियां जताने के लिए लिंक भी शेयर किया है। बोर्ड ने साफ किया है कि किसी भी सवाल के जवाब में आपत्ति सबूतों के साथ 23 जून तक दर्ज कराई जा सकती है। उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती परीक्षा 8,9 और 10 जून को आयोजित हुई थी।

यूपी में आरक्षी नागरिक पुलिस और इसके समकक्ष पदों पर सीधी भर्ती हो रही है। उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड ने एक्स पोस्ट में बताया कि भर्ती के लिए आयोजित लिखित परीक्षा की उत्तर कुंजी का प्रकाशन बोर्ड की वेबसाइट पर किया गया है। अभ्यर्थी बोर्ड की वेबसाइट पर उपलब्ध लिंक पर जाकर अपना अनुक्रमांक, जन्मतिथि और प्रश्न पुस्तिका क्रमांक की सहायता से लॉगिन करके उत्तरकुंजी देख सकते हैं। परीक्षा में शामिल प्रश्नों पर साक्ष्यधारित आपत्तियां 20 से 23 जून तक दर्ज कर सकते हैं।

पुलिस भर्ती पारदर्शिता के साथ की गई- सीएम योगी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को कहा था कि उनकी सरकार में पुलिस भर्ती पूरी पारदर्शिता के साथ और बिना किसी सिफारिश या भेदभाव के की गई और केवल योग्यता ही चयन का आधार है। योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि कानून का शासन और सुशासन स्थापित करने के लिए पारदर्शी भर्ती आवश्यक थी। उन्होंने कहा था कि हाल में पुलिस आरक्षियों के लगभग 35,000 पदों के लिए परीक्षा आयोजित की गई थी, जिसमें लगभग 28 लाख युवाओं ने आवेदन किया था। इससे पहले, 41,000 होम गार्ड पदों के लिए भी परीक्षा आयोजित की गई थी। पिछले नौ वर्षों में विभिन्न चरणों में लगभग 2.15 लाख पुलिस कर्मियों की भर्ती की गई है। ये सभी प्रक्रियाएं पूरी पारदर्शिता के साथ पूरी की गई हैं। इसमें कोई सिफारिश नहीं की गई है, कोई भेदभाव नहीं किया गया है।”

यूपी के सात जिलों में आयुक्त प्रणाली लागू

यूपी के सात जिलों में आयुक्त प्रणाली लागू हो गई है, जो पुलिस सुधारों का एक हिस्सा है। उत्तर प्रदेश सरकार ने जनवरी 2020 में गौतमबुद्धनगर और लखनऊ से शुरुआत करते हुए पुलिस व्यवस्था की आयुक्त प्रणाली की स्थापना की थी । यह प्रणाली अंततः पांच और जिलों वाराणसी, प्रयागराज, गाजियाबाद, कानपुर और आगरा में शुरू की गई। आयुक्त प्रणाली के तहत, पुलिस आयुक्त (एक आईपीएस अधिकारी) बढ़ी हुई कार्यकारी शक्तियों के साथ पुलिस व्यवस्था का नेतृत्व करता है, जो पहले की व्यवस्था की जगह लेता है । पहले की व्यवस्था में जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक कानून-व्यवस्था की कई जिम्मेदारियां साझा करते थे।