प्रदेश सरकार अब परिषदीय और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों (केजीबीवी) के बच्चों को केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित न रखकर उन्हें नवाचार, रिसर्च और आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। भारत इनोवेट्स 2026 अभियान के माध्यम से पहली बार गांव और कस्बों के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों तक डीप टेक्नोलॉजी और वैज्ञानिक सोच पहुंचाने की तैयारी की गई है।
शिक्षा मंत्रालय, केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के तहत प्रदेश के सभी परिषदीय और केजीबीवी विद्यालयों में मई 2026 के दौरान विभिन्न नवाचार आधारित कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन गतिविधियों में शिक्षकों और छात्र-छात्राओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। कार्यक्रम के तहत विद्यालयों में “विकसित भारत के नवाचार परिदृश्य” विषय पर संगोष्ठी, “डीप टेक्नोलॉजी” विषय पर विशेष कक्षाएं, “भारत क्विज- भारत के नवाचार को कौन जानता है?” जैसी प्रतियोगिताएं और निबंध लेखन गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य बच्चों को केवल सैद्धांतिक जानकारी देना नहीं, बल्कि उनमें जिज्ञासा, वैज्ञानिक सोच, रचनात्मकता और समस्या समाधान की क्षमता विकसित करना है।
सरकार का मानना है कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को भी वही आधुनिक सीखने का वातावरण मिलना चाहिए, जो अब तक बड़े शहरों और चुनिंदा संस्थानों तक सीमित रहा है। इसी सोच के तहत अब सरकारी विद्यालयों में भी तकनीक आधारित गतिविधियों और इनोवेशन कल्चर को बढ़ावा दिया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, बच्चों को शुरुआती स्तर पर वैज्ञानिक सोच और तकनीकी समझ से जोड़ने से वे भविष्य की चुनौतियों के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो सकेंगे।
स्वयंसेवी संस्थाओं का भी मिलेगा सहयोग
विद्यालयों में कार्यक्रमों को प्रभावी बनाने के लिए स्थानीय स्वयंसेवी संस्थाओं और विषय विशेषज्ञों का सहयोग भी लिया जाएगा। शासन ने निर्देश दिए हैं कि कार्यक्रम अधिक सहभागितापूर्ण हों ताकि अधिक से अधिक छात्र-छात्राएं इसमें जुड़ सकें। साथ ही गतिविधियों की फोटो, वीडियो और नवाचार संबंधी जानकारियों का दस्तावेजीकरण भी किया जाएगा।
आधुनिक शिक्षा मॉडल की ओर बढ़ता यूपी
प्रदेश सरकार पहले ही निपुण भारत मिशन, स्मार्ट क्लास, डिजिटल मॉनिटरिंग और स्कूल कायाकल्प जैसे अभियानों के जरिए शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक स्वरूप देने पर काम कर रही है। भारत इनोवेट्स 2026 को उसी व्यापक विजन का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके तहत सरकारी स्कूलों के बच्चों को भी भविष्य की तकनीक और नवाचार संस्कृति से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
