चीन और जापान की दुश्मनी जग जाहिर है। चीन इस बात से परेशान है कि जापान परमाणु बम परीक्षण कर सकता है। चीन को डर है कि कहीं जापान भी परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र बन गया, तो उसके लिए मुश्किल खड़ी होगी। यही वजह है कि उसने संयुक्त राष्ट्र संघ में जापान को परमाणु बम के परीक्षण से रोकने की गुहार लगाई है। जापान ने भी अब चीन से आंखों से आंखें मिलाकर बात करने की ठान ली है।
चीन की बढ़ती दादागिरी को रोकने के लिए ही उसने अपने पड़ोसी और चीन के दुश्मन राष्ट्रों के साथ सामरिक दृष्टि से अपने रिश्ते मजबूत करने शुरू कर दिए हैं। जापान ने न सिर्फ फिलीपींस के साथ मिल कर दक्षिण चीन सागर में चीन की आक्रामकता को रोकने के लिए कदम उठाया, बल्कि आस्ट्रेलिया, वियतमान से भी उसने कई समझौते किए हैं, जो चीन की टेंशन बढ़ाने वाले हैं।
द्वितीय विश्व युद्ध में जापान और उसके मित्र राष्ट्रों को हार का सामना करना पड़ा था। इस युद्ध में मिली हार के बाद से ही जापान और चीन में तनाव बना हुआ है। बीच-बीच में रिश्ते सुधर जाते हैं, लेकिन कई ऐसे मौके आते हैं, जब चीन दादागिरी दिखाने की कोशिश करता है, तो जापान को भी आंखें तरेरनी पड़ती हैं। फिलहाल पिछले कई महीने से चीन और जापान के बीच तनाव का सबसे बड़ा कारण है ताइवान।
जापान की प्रधानमंत्री सनाई तकाइची द्वारा ताइवान की चीन से रक्षा के एलान से ही चीन नाराज है। कई बार उसने जापान की समुद्री सीमा और हवाई सीमा का उल्लंघन किया है। चीन सीधे जापान को युद्ध की धमकी देता है। इससे जापान नाराज है और चीन के बढ़ते खतरे को देखते हुए ही अपनी सामरिक शक्ति को बढ़ाने का एलान कर चुका है।
द्वितीय विश्व युद्ध के बाद जापान ने शांतिवादी नीति अपना ली थी और उसने घातक हथयारों के उत्पादन और निर्यात पर खुद ही प्रतिबंध लगा दिया था। तय किया गया था कि उसकी सेना सिर्फ आत्मरक्षा तक सीमित रहेगी, लेकिन अब उसने चीन और उत्तर कोरिया की बढ़ती आक्रमकता को देखते हुए अपनी नीति में बदलाव कर दिया है और लड़ाकू विमान, मिसाइल आदि के निर्यात को मंजूरी दे दी है। यहां तक कि परमाणु बम बनाने की दिशा में भी उसने कदम उठाए हैं।
इसके संकेत मिलते ही चीन परेशान हो उठा है, इसीलिए चीन ने पहली बार आधिकारिक तौर पर संयुक्त राष्ट्र को इसकी जानकारी दी है और यह कहा है कि यदि जापान को रोका नहीं गया, तो वह आने वाले दिनों में परमाणु हथियार का परीक्षण कर सकता है। चीन का तो यहां तक दावा है कि जापान के पास प्लूटोनियम की इतनी मात्रा है कि वह 55 सौ परमाणु हथियार बना सकता है।
