नई दिल्ली। अयोध्या में श्रीराम मंदिर के चढ़ावे और कीमती दान में कथित अनियमितताओं को लेकर राजनीतिक विवाद एक बार फिर तेज हो गया है। कांग्रेस ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस मामले में जवाब देने की मांग की। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने पूरे प्रकरण की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने की मांग भी दोहराई।
जयराम रमेश ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट कर आरोप लगाया कि राम मंदिर ट्रस्ट में कथित अनियमितताओं से जुड़े सवालों का जवाब मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश जानना चाहता है कि चढ़ावे से जुड़े मामले में कथित तौर पर कौन-कौन जिम्मेदार है। कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि श्रद्धालुओं की ओर से दिए गए दान का पूरा हिसाब सार्वजनिक होना चाहिए।
2020 के ऑडिट को लेकर कांग्रेस ने उठाए सवाल
जयराम रमेश ने दावा किया कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के गठन के कुछ महीने बाद नवंबर 2020 में एक निजी ऑडिट कंपनी ने आंतरिक ऑडिट और जोखिम प्रबंधन से जुड़ी कई खामियों की ओर ध्यान दिलाया था।कांग्रेस नेता के मुताबिक, ऑडिट में प्रबंधन को गैरपेशेवर बताते हुए जिम्मेदारियों के स्पष्ट निर्धारण, दान का व्यवस्थित रिकॉर्ड रखने और लेन-देन तथा डेटा एंट्री की दोबारा जांच करने की व्यवस्था पर सवाल उठाए गए थे।
उन्होंने यह भी दावा किया कि बैंक मिलान, लेखांकन के लिए योग्य कर्मचारियों की उपलब्धता और आईटी डेटा की सुरक्षा व सत्यापन से जुड़ी व्यवस्थाओं में कमियां बताई गई थीं। रमेश ने सवाल किया कि यदि इन जोखिमों के बारे में पहले ही चेतावनी दी गई थी, तो उन्हें दूर करने के लिए क्या कदम उठाए गए।
एसआईटी जांच का हवाला देकर नकदी की गिनती पर सवाल
कांग्रेस महासचिव ने 2026 में गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) की जांच का हवाला देते हुए दावा किया कि नकदी की गिनती वाले कमरे से 105 बार नकदी निकाली गई। उन्होंने आरोप लगाया कि कर्मचारी कथित तौर पर कैमरों के सामने खड़े होकर उन्हें ढक देते थे।
रमेश ने यह सवाल भी उठाया कि शिकायत करने वाले व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई क्यों की गई और श्रद्धालुओं की ओर से दिए गए कुछ कीमती दान की रसीदें कथित तौर पर क्यों जारी नहीं की गईं। इन आरोपों को लेकर कांग्रेस ने मामले की विस्तृत जांच और जिम्मेदार लोगों की भूमिका स्पष्ट करने की मांग की है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित पक्षों का जवाब इस खबर में उपलब्ध जानकारी के आधार पर स्थापित नहीं है।
ठेकों में 40 प्रतिशत कमीशन का भी लगाया आरोप
जयराम रमेश ने मंदिर निर्माण से जुड़े इंजीनियर दीनानाथ वर्मा की शिकायतों का भी उल्लेख किया। उनके मुताबिक, वर्मा ने ट्रस्ट के पदाधिकारी चंपत राय पर ठेकों में कथित तौर पर 40 प्रतिशत कमीशन लेने, फर्जी मजदूर दिखाने और सामग्री के बढ़े हुए बिल तैयार करने जैसे आरोप लगाए थे।
कांग्रेस नेता के अनुसार, वर्मा ने दावा किया था कि शिकायत पर कार्रवाई करने के बजाय उन्हें ही पद से हटा दिया गया। रमेश ने यह भी कहा कि जांच में कुछ बेशकीमती वस्तुओं के संबंध में दानदाताओं को रसीद जारी नहीं किए जाने का मामला सामने आया था। इन आरोपों को संबंधित पक्षों की पुष्टि के बिना स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता। मामले में आरोपों की जांच और संबंधित पक्षों का जवाब महत्वपूर्ण होगा।
सरकारी एसआईटी की जांच पर भी कांग्रेस ने जताया अविश्वास
जयराम रमेश ने कहा कि कांग्रेस को सरकारी एसआईटी की जांच पर भरोसा नहीं है। उनके मुताबिक, केवल कुछ कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने से पूरे मामले का समाधान नहीं होगा। उन्होंने मांग की कि कथित अनियमितताओं में शामिल सभी लोगों की भूमिका की जांच की जाए।
कांग्रेस का कहना है कि ऑडिट में बताई गई कथित खामियों, ठेकों में कमीशनखोरी के आरोपों, नकदी के लेन-देन और कीमती दान का पूरा हिसाब सामने आना चाहिए। पार्टी ने एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने की मांग उठाई है। जयराम रमेश ने कहा कि राम मंदिर के लिए श्रद्धालुओं की ओर से दिए गए चढ़ावे का हिसाब सार्वजनिक होना चाहिए और आस्था के नाम पर किसी को जवाबदेही से छूट नहीं मिलनी चाहिए।
