कोरोना काल में पति की नौकरी छूटने से घर की आर्थिक स्थिति बिगड़ी तो रुचि द्विवेदी के सामने भी मुश्किलों का दौर था। बाहर जाकर नौकरी करना संभव नहीं था। ऐसे में मां को अचार बनाते देखकर बचपन से सीखे हुनर को उन्होंने रोजगार का जरिया बनाने की ठानी। वर्ष 2021 में घर से शुरू हुआ अचार का छोटा सा काम आज कारोबार बन चुका है। उनके हाथों से तैयार अचार सुलतानपुर के अलावा लखनऊ, अहमदाबाद, प्रयागराज और दिल्ली तक पहुंच रहा है।
मुश्किल वक्त में मां का हुनर बना रास्ता
रुचि बताती हैं कि आर्थिक संकट के दौर में उन्होंने घर बैठे कुछ करने का फैसला लिया। मां को अचार बनाते देखकर मन में इसे व्यवसाय के रूप में शुरू करने का विचार आया। काम को बेहतर ढंग से समझने के लिए कुछ महीने प्रशिक्षण भी लिया। इस सफर में मां-पिता ने उनका हौसला बढ़ाया और हर कदम पर सहयोग किया। शुरुआत आसान नहीं थी। उत्पाद तैयार करने के बाद ग्राहक और बाजार तलाशना चुनौती थी, लेकिन जिन लोगों ने अचार चखा, उन्हें स्वाद पसंद आया। इसके बाद धीरे-धीरे ऑर्डर बढ़ने लगे।
घर के मसालों से तैयार होता है अचार
रुचि के यहां कई तरह के अचार तैयार किए जाते हैं। खास बात यह है कि अचार में इस्तेमाल होने वाले मसाले भी घर पर ही तैयार किए जाते हैं। घरेलू स्वाद और गुणवत्ता बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है। इसी स्वाद ने स्थानीय ग्राहकों के साथ दूसरे शहरों में रहने वाले लोगों को भी जोड़ा।
अचार से पापड़, लड्डू और गुझिया तक
समय के साथ कारोबार का दायरा भी बढ़ा। अब अचार के साथ पापड़, चिप्स, कचरी, मुरब्बा और कई तरह के लड्डू तैयार किए जाते हैं। सर्दियों में अलसी के लड्डू की खास मांग रहती है। वहीं मांग पर गुझिया भी तैयार की जाती है। रुचि अब अपने इस घरेलू कारोबार को ऑनलाइन ले जाने की तैयारी में हैं, ताकि घर की रसोई से शुरू हुआ यह सफर और दूर तक पहुंचे।
