भारतीय संगीत जगत में भक्ति संगीत को लोकप्रिय बनाने वाले महान गायकों में अनूप जलोटा का नाम अत्यंत सम्मान के साथ लिया जाता है। अपनी मधुर और भावपूर्ण आवाज़ के कारण उन्होंने देश-विदेश में करोड़ों संगीत प्रेमियों के हृदय में विशेष स्थान बनाया है। उन्हें लोकप्रिय रूप से “भजन सम्राट” कहा जाता है।
अनूप जलोटा का जन्म 29 जुलाई 1953 को नैनीताल, उत्तराखंड में हुआ। संगीत उन्हें पारिवारिक वातावरण से मिला। उनके पिता पुरुषोत्तम दास जलोटा भी प्रसिद्ध भजन गायक थे। इसी संगीत संस्कार ने अनूप जलोटा को छोटी उम्र से ही गायन की ओर प्रेरित किया।
उन्होंने अपने करियर की शुरुआत संगीत की दुनिया में एक कोरस गायक के रूप में की और धीरे-धीरे अपनी अलग पहचान बनाई। उनके भजनों में सरल शब्दों, मधुर धुन और गहरी आध्यात्मिक अनुभूति का सुंदर मेल दिखाई देता है। “ऐसी लागी लगन मीरा हो गई मगन”, “रंग दे चुनरिया”, “जग में सुंदर हैं दो नाम” और “मैया मोरी मैं नहीं माखन खायो” जैसे भजनों ने उन्हें घर-घर में लोकप्रिय बना दिया।
अनूप जलोटा की गायकी की सबसे बड़ी विशेषता उनकी आवाज़ की शांति और भावपूर्ण प्रस्तुति है। वे केवल भजन ही नहीं, बल्कि ग़ज़ल, गीत और अन्य भारतीय संगीत शैलियों में भी अपनी प्रतिभा का परिचय दे चुके हैं। उनके संगीत कार्यक्रम भारत के साथ-साथ विदेशों में भी बेहद लोकप्रिय रहे हैं।
भक्ति संगीत को आधुनिक मंच तक पहुँचाने और नई पीढ़ी को भारतीय आध्यात्मिक संगीत से जोड़ने में अनूप जलोटा का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उनकी आवाज़ में भक्ति, प्रेम और भारतीय संस्कृति की गहरी झलक मिलती है। वे आज लखनऊ में अपने भजनों कि अविरल धारा बहायेंगे ,और लखनऊ के श्रोता उनकी इस प्रस्तुति के साक्षी बनेंगे
अनूप जलोटा का संगीत केवल सुनने का अनुभव नहीं है, बल्कि यह श्रोता को भीतर तक छूने वाली आध्यात्मिक अनुभूति भी प्रदान करता है। भारतीय भजन संगीत के इतिहास में उनका योगदान लंबे समय तक याद किया जाएगा।
