डॉ.राजेश्वर सिंह : अवैध कालोनियों पर तत्काल रोक लगे जिससे जनता को नाली,सड़क,सीवर,जलापूर्ति व स्ट्रीट लाइट जैसी सुविधांए मिल सके

Lucknow
  • लखनऊ के सुनियोजित विकास के लिए विशेष आर्थिक पैकेज जरूरी: डॉ. राजेश्वर सिंह
  • मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर विशेष पैकेज, विशेषज्ञ समिति, अवैध कॉलोनियों पर पूर्ण रोक और ‘ग्रीन लखनऊ मिशन-2035’ की मांग

लखनऊ, 5 सितंबर। सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर लखनऊ के सुनियोजित एवं दीर्घकालीन विकास के लिए आगामी राज्य बजट में विशेष आर्थिक, नगरीय नियोजन एवं प्रशासनिक पैकेज शामिल करने का अनुरोध किया है। उन्होंने जलभराव निस्तारण तथा किला मोहम्मदी नाले के पुनर्निर्माण के लिए करीब 175 करोड़ रुपये की स्वीकृति देने पर मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मेट्रो, आउटर रिंग रोड, गोमती रिवरफ्रंट, एक्सप्रेसवे और बेहतर कानून-व्यवस्था ने राजधानी को नई गति और पहचान दी है। डॉ. सिंह ने कहा कि वर्ष 1991 में करीब 16.7 लाख रही लखनऊ की आबादी अब लगभग 42-43 लाख हो चुकी है, जबकि निर्मित क्षेत्र 48 वर्ग किलोमीटर से बढ़कर 310 वर्ग किलोमीटर से अधिक हो गया है। ऐसे में लखनऊ, हरदोई, सीतापुर, उन्नाव, रायबरेली और बाराबंकी को शामिल करते हुए 27,826 वर्ग किलोमीटर के उत्तर प्रदेश राज्य राजधानी क्षेत्र (SCR) के समन्वित विकास की चुनौती भी सामने है। उन्होंने कहा कि राजधानी का नियोजन केवल नगर सीमा तक सीमित नहीं रह सकता और वर्ष 2050 तक का एकीकृत क्षेत्रीय रोडमैप तैयार किया जाना जरूरी है।

  • विशेषज्ञ समिति और अवैध कॉलोनियों पर सख्त कार्रवाई की मांग

डॉ. राजेश्वर सिंह ने जलभराव, यातायात दबाव, सीवर की अपर्याप्तता, अनधिकृत कॉलोनियों, ठोस कचरे और भूजल संकट को लखनऊ के तेजी से हो रहे विस्तार से जुड़ी प्रमुख चुनौतियां बताया। उन्होंने शहरी नियोजकों, भूजल विशेषज्ञों, पर्यावरणविदों, अभियंताओं, परिवहन योजनाकारों और वित्त विशेषज्ञों की उच्चाधिकार प्राप्त बहुवर्षीय विशेषज्ञ समिति गठित करने का प्रस्ताव रखा। समिति में एलडीए, नगर निगम, जल निगम, भूगर्भ जल विभाग, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा आवास एवं शहरी नियोजन विभाग के बीच समन्वय सुनिश्चित करने की मांग की गई है। उन्होंने SCR प्राधिकरण की बैठक शीघ्र बुलाने की भी मांग की। विधायक ने नई अवैध कॉलोनियों और अनधिकृत निर्माणों पर पूर्ण रोक लगाने के लिए सैटेलाइट एवं ड्रोन निगरानी, ले-आउट स्तर पर कार्रवाई, तहसील एवं उप-निबंधक अभिलेखों को एलडीए के स्वीकृत ले-आउट डेटाबेस से जोड़ने तथा RERA और नियोजन कानूनों के कठोर प्रवर्तन का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि भू-माफिया के खिलाफ आपराधिक मुकदमे दर्ज होने चाहिए और अवैध कॉलोनी बसने में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जानी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि कोई अवैध कॉलोनी रातोंरात नहीं बनती और कॉलोनी बस जाने के बाद सड़क, नाली, सीवर, जलापूर्ति व स्ट्रीट लाइट जैसी सुविधाओं का दबाव सार्वजनिक संस्थाओं और करदाताओं पर पड़ता है।

  • राजस्व बढ़ाने के साथ ‘ग्रीन लखनऊ मिशन-2035’ का प्रस्ताव

डॉ. सिंह ने नगर निगम के करीब 4,304 करोड़ रुपये के वार्षिक बजट को लखनऊ की आबादी और महानगरीय दायित्वों की तुलना में अपर्याप्त बताते हुए एलडीए और नगर निगम के राजस्व में वृद्धि के लिए प्रत्येक संपत्ति की GIS मैपिंग, सभी संपत्तियों को कर दायरे में लाने, विकास एवं प्रभाव शुल्क की प्रभावी वसूली, Land-Value Capture, Premium FSI, Betterment Levy, Transferable Development Rights, नियमितीकरण शुल्क और पारदर्शी परिसंपत्ति मुद्रीकरण जैसे उपाय सुझाए। उन्होंने म्युनिसिपल एवं ग्रीन बॉन्ड, मीटर आधारित जल-सीवर शुल्क, रूफटॉप सोलर, शिवरी की 15 मेगावाट Waste-to-Energy परियोजना और पूर्ण डिजिटलीकरण के जरिए राजस्व रिसाव रोकने पर भी जोर दिया। इसके साथ ही उन्होंने ‘ग्रीन लखनऊ मिशन-2035’ शुरू करने का प्रस्ताव रखा, जिसके तहत जलाशयों एवं आर्द्रभूमियों की बहाली, गोमती पारिस्थितिकी का संरक्षण, प्रमुख मार्गों, मेट्रो और आउटर रिंग रोड के किनारे ग्रीन कॉरिडोर, अनिवार्य वर्षाजल संचयन, भूजल पुनर्भरण, Heat-Resilient Planning तथा वार्षिक GIS एवं सैटेलाइट ऑडिट जैसे प्रावधान किए जाने चाहिए। डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि लखनऊ को केवल आज की समस्याओं का समाधान करने के बजाय आने वाले 25 वर्षों के लिए वैज्ञानिक, हरित, वित्तीय रूप से सशक्त और जवाबदेह विकास व्यवस्था तैयार करने की आवश्यकता है।