लखनऊ। बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय के प्रबंध अध्ययन विभाग द्वारा आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी “राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 : शिक्षा में बदलाव और विकसित भारत के लिए उत्कृष्टता” का समापन हुआ। संगोष्ठी में देश-विदेश के शिक्षाविदों, नीति विशेषज्ञों, उद्योग प्रतिनिधियों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के विभिन्न आयामों पर विचार रखे।
- गुणवत्तापूर्ण और समावेशी शिक्षा पर जोर
कार्यक्रम की शुरुआत बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर के चित्र पर माल्यार्पण एवं विश्वविद्यालय कुलगीत की प्रस्तुति से हुई। कार्यक्रम संयोजक प्रो. तरुणा ने अतिथियों, प्रतिभागियों एवं शोधार्थियों का स्वागत करते हुए दो दिनों की गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि संगोष्ठी से प्राप्त सुझाव विकसित भारत-2047 के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण, समावेशी और नवाचार आधारित शिक्षा व्यवस्था के निर्माण में उपयोगी होंगे।
- शिक्षा और उद्योग के बीच बेहतर तालमेल जरूरी
विशिष्ट अतिथि फेडरल बैंक के वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवं देश प्रमुख अनूप थलाची ने शिक्षा और उद्योग के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि रोजगारपरक और कौशल आधारित शिक्षा विद्यार्थियों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने नेतृत्व क्षमता के विकास के लिए विद्यार्थियों को अच्छा श्रोता बनने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
- अनुसंधान और नवाचार को मिले बढ़ावा
मुख्य अतिथि केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, लखनऊ के निदेशक डॉ. टी. दामोदरन ने अनुसंधान एवं नवाचार को शिक्षा नीति के केंद्र में रखने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि विज्ञान एवं तकनीकी शिक्षा को स्थानीय जरूरतों और राष्ट्रीय विकास लक्ष्यों से जोड़ना जरूरी है। विश्वविद्यालयों में समाजोपयोगी शोध तथा उद्योग-अकादमिक सहभागिता को मजबूत करने पर भी उन्होंने जोर दिया।
- रोजगार देने की क्षमता विकसित करें युवा
अध्यक्षीय संबोधन में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजकुमार मित्तल ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 केवल शिक्षा सुधार का दस्तावेज नहीं, बल्कि भारत को ज्ञान आधारित, आत्मनिर्भर एवं विकसित राष्ट्र बनाने का राष्ट्रीय संकल्प है। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा, मूल्यपरक शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार, कौशल विकास और उद्यमिता के समन्वय से ही विकसित भारत-2047 का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। उन्होंने युवाओं में रोजगार पाने के साथ रोजगार देने की क्षमता विकसित करने पर विशेष जोर दिया।
- शिक्षकों और विद्यार्थियों की रही सहभागिता
समारोह के दौरान अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया गया। प्रतिभागियों ने संगोष्ठी को ज्ञानवर्धक, उपयोगी एवं प्रेरणादायी बताया। इस अवसर पर प्रो. नवीन अरोड़ा, प्रो. ओ.पी.बी. शुक्ला, प्रो. शिखा, डॉ. अनिल कुमार यादव, डॉ. जीवन सिंह और डॉ. लता बाजपेयी सिंह सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक, शोधार्थी एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी मौजूद रहे। अंत में संकायाध्यक्ष प्रो. अमित सिंह ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
