सांसद रुचि वीरा से विवाद के बाद सपा MLA कमाल अख्तर का मुख्य सचेतक पद से इस्तीफा

# ## UP

समाजवादी पार्टी (सपा) के भीतर से एक बड़ी खबर आई है. मुरादाबाद की कांठ विधानसभा सीट से सपा के कद्दावर विधायक कमाल अख़्तर ने विधानमंडल के मुख्य सचेतक पद से इस्तीफा दे दिया है. इस इस्तीफे को पिछले दिनों मुरादाबाद की सांसद रुचि वीरा और विधायक कमाल अख्तर के बीच हुई कथित अनबन से जोड़कर देखा जा रहा है. इस विवाद के बाद लखनऊ में पार्टी आलाकमान ने दोनों नेताओं को तलब कर एक महत्वपूर्ण बैठक भी बुलाई थी.

इस बैठक के ठीक बाद आज कमाल अख्तर के इस्तीफे की खबर ने सबको चौंका दिया है. इस्तीफे के बाद टीवी9 यूपी से खास बातचीत करते हुए विधायक कमाल अख्तर ने कहा कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने जो भी फैसला लिया है, वह हमें मंजूर है, हम पार्टी के वफादार और सच्चे कार्यकर्ता हैं, राष्ट्रीय अध्यक्ष जी के आदेश पर ही मैंने आज अपने पद से यह इस्तीफा सौंपा है. मनोज पांडेय के बागी होने के बाद कमाल अख्तर को चीफ व्हिप बनाया गया था.

अखिलेश के कहने पर इस्तीफा

सपा विधायक कमाल अख्तर ने कहा, ‘मैं पार्टी के लिए काम करता हूं, मेरी किसी से कोई लड़ाई नहीं है, पार्टी में कोई फूट नहीं है, हम पार्टी को बढ़ाने के लिए काम कर हैं, राष्ट्रीय अध्यक्षजी ने मुझसे कहा तो मैंने इस्तीफा दे दिया, मैं पार्टी के लिए जिस तरीके से काम करता हूं, वैसे ही करता रहूंगा.’ कयास लगाए जा रहे हैं कि संगठन के भीतर संतुलन बनाने और मुरादाबाद की राजनीति में सपा के दो फाड़ को रोकने के लिए आलाकमान ने यह बदलाव किया है.

रुचि वीरा विवाद के बाद आया फैसला

कमाल अख्तर का इस्तीफा ऐसे समय सामने आया है, जब कुछ दिन पहले मुरादाबाद में आयोजित पीडीए सम्मेलन को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया था. सांसद रुचि वीरा ने आरोप लगाया था कि उन्हें कार्यक्रम में आमंत्रित नहीं किया गया और पोस्टरों से उनकी तस्वीर भी गायब रखी गई. उन्होंने सीधे तौर पर कमाल अख्तर पर गुटबाजी को बढ़ावा देने का आरोप लगाया था. इसके बाद अखिलेश यादव ने दोनों नेताओं को लखनऊ बुलाकर पूरे मामले की समीक्षा की थी.

कमाल अख्तर ने आरोपों से किया था इनकार

रुचि वीरा के आरोपों के बाद कमाल अख्तर ने अपना पक्ष रखते हुए कहा था कि पीडीए कार्यक्रम का आयोजन उनके द्वारा नहीं कराया गया था. उन्होंने कहा था कि वे केवल अतिथि के रूप में कार्यक्रम में शामिल हुए थे और आयोजन की जिम्मेदारी स्थानीय संगठन की थी. उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि सांसद रुचि वीरा अपने पोस्टरों में स्थानीय विधायकों की तस्वीरें नहीं लगाती हैं और गुटबाजी के आरोप निराधार हैं.

मनोज पांडेय के बाद बने थे चीफ व्हिप

कमाल अख्तर को विधानमंडल में मुख्य सचेतक की जिम्मेदारी उस समय दी गई थी, जब सपा के वरिष्ठ नेता मनोज पांडेय के बगावती रुख के बाद पार्टी को नए चीफ व्हिप की जरूरत पड़ी थी. विधानसभा में पार्टी के विधायकों के समन्वय और अनुशासन बनाए रखने की जिम्मेदारी मुख्य सचेतक की होती है. ऐसे में कमाल अख्तर का इस पद से हटना संगठन के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

2027 चुनाव से पहले अनुशासन पर फोकस

समाजवादी पार्टी 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुट चुकी है. पार्टी ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) रणनीति के जरिए अपने जनाधार को मजबूत करने का प्रयास कर रही है. ऐसे समय में पार्टी नेतृत्व नहीं चाहता कि स्थानीय स्तर की गुटबाजी चुनावी तैयारियों पर असर डाले. यही वजह है कि अखिलेश यादव लगातार जिलों की समीक्षा बैठकें कर रहे हैं और संगठन में अनुशासन बनाए रखने पर जोर दे रहे हैं.