लखनऊ: लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने अलीगंज की उस अवैध व्यावसायिक इमारत को गिराने का नोटिस जारी कर दिया है, जिसमें सोमवार दोपहर लगी भीषण आग के कारण 15 लोगों की मौत हो गई थी। एलडीए के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने यह जानकारी साझा की है। इसके साथ ही, एलडीए ने इस रिहायशी इमारत को व्यावसायिक तौर पर गैर-कानूनी तरीके से संचालित करने के मामले में अपने ही संबंधित अधिकारियों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
2016 में भी आया था गिराने का आदेश, दो महीने में हुआ था वापस
प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक, इस तीन मंजिला इमारत को साल 2016 में भी गैर-कानूनी निर्माण के चलते गिराने का आदेश दिया गया था, लेकिन महज दो महीने से भी कम समय के भीतर उस आदेश को संदिग्ध परिस्थितियों में वापस ले लिया गया था। एलडीए के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने बताया, “हमने अलीगंज की उस इमारत को निर्माण संबंधी नियमों के उल्लंघन को लेकर एक बार फिर गिराने का नोटिस जारी किया है, जहां सोमवार को आग लगी थी।” उन्होंने आगे कहा, “हमने लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ भी जांच शुरू कर दी है और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।” फिलहाल ऐसे अधिकारियों की पहचान करने और पिछले सालों में उनकी भूमिका व जिम्मेदारियों का पता लगाने की प्रक्रिया चल रही है।
मामले में अब तक की बड़ी कार्रवाई
पुलिस और प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए त्वरित कानूनी कार्रवाई की है:
4 गिरफ्तारियां
पुलिस के अनुसार, सोमवार को इस मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनकी पहचान रामकृष्ण उपाध्याय (43 वर्ष), वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला (62 वर्ष), तुषार कृष्ण जायसवाल (31 वर्ष) और सुरेश कुमार साहू के रूप में हुई है।
4 अधिकारी निलंबित
लापरवाही बरतने के आरोप में बिजली विभाग, अग्निशमन (फायर) विभाग और लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) के चार अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है।
